15 की स्पीड से जा रहे कंटेनर में घुसी 150kmph वाली SUV; सामने आया 6 दोस्तों की मौत वाली रात का सच

Sourabh Jain लाइव हिन्दुस्तान, देहरादून, उत्तराखंड
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  • हादसे की गंभीरता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों में से 2 के सिर धड़ से अलग हो गए थे, वहीं एक युवती का सिर कार की छत से फट गया था। घटनास्थल पर जो हालात थे वे बहुत ही विचलित करने वाले थे।

15 की स्पीड से जा रहे कंटेनर में घुसी 150kmph वाली SUV; सामने आया 6 दोस्तों की मौत वाली रात का सच

देहरादून में महीनेभर पहले 11 नवंबर की देर रात ONGC चौक पर हुए दर्दनाक हादसे को लेकर जेपी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट पुलिस और परिवहन विभाग को सौंप दी है। रिपोर्ट में हादसे की असल वजह कार की ओवरस्पीड को बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार हादसे के वक्त कंटेनर लगभग 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से घटनास्थल से गुजर रहा था, जबकि उसके पिछले हिस्से से जाकर टकराई कार की रफ्तार 150 किमी प्रतिघंटा के करीब थी।

ONGC चौक पर हुए इस कार हादसे में तब छह युवाओं की दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि सातवां युवक गंभीर रूप से घायल हुआ था। कंटेनर किशननगर चौक से कौलागढ़ और कार बल्लूपुर चौक से गढ़ी कैंट जा रही थी। इसी दौरान तेज रफ्तार कार ONGC चौक पर मुड़ रहे कंटेनर के बाईं ओर के पिछले हिस्से में जा घुसी थी। इससे कार का केबिन एरिया पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जबकि कार की छत का बड़ा हिस्सा कंटेनर पर रुई की तरह चिपक गया था।

कंटेनर में घुसने के बाद कार नीचे से निकलकर करीब 80 मीटर आगे जाकर पेड़ से टकराकर रुक गई थी। इस दौरान कार में पेड़ का तना करीब 30 सेमी अंदर घुस गया था। इससे माना गया कि पेड़ से टकराते वक्त भी कार की रफ्तार 70 किमी प्रतिघंटा के करीब थी। JPRI के COO कमांडर प्रदीप के जसवानी (रिटायर) ने हादसे की यह रिपोर्ट यातायात निदेशक अरुण मोहन जोशी और संयुक्त आयुक्त-परिवहन एसके सिंह को भेजी है।

JPRI ने अपनी रिपोर्ट में बताया ये सब

● कार की अत्यधिक रफ्तार दुर्घटना का मुख्य कारण बनी।

● कार सवारों ने सीट बेल्ट नहीं पहनी थी, जिससे टक्कर के प्रभाव को सहने की क्षमता कम हो गई।

● कंटेनर में अंडरराइड प्रोटेक्शन डिवाइस और रिफ्लेक्टर जैसे सुरक्षा उपकरण नहीं थे।

● घटनास्थल पर गति सीमा के संकेत और स्पीड ब्रेकर नहीं थे।

JPRI ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कार की अत्यधिक तेज रफ्तार दुर्घटना का मुख्य कारण है। इस दौरान कार सवारों ने सीट बेल्ट भी नहीं लगा रखे थे, इस वजह से उन्हें बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक कंटेनर में अंडरराइड प्रोटेक्शन डिवाइस और रिफ्लेक्टर जैसे सुरक्षा उपकरण भी नहीं लगे थे। ना ही घटनास्थल पर गति सीमा के संकेत और स्पीड ब्रेकर लगे थे।

इस तरह हुआ था हादसा

हादसे वाली रात कंटेनर किशन नगर चौक के पास कंटेनर की क्रॉसिंग के दौरान, अधिक स्पीड होने की वजह SUV चालक वाहन निकलने को लेकर सही अंदाजा नहीं लगा पाया और उसे लगा कि कंटेनर पूरा निकलने के बाद वे आराम से क्रॉस हो जाएंगे। इसी जल्दबाजी में इनोवा वाहन क्रासिंग के दौरान, कंटेनर के पिछले हिस्से से टकराकर उसमें घुस गया था।

क्षत-विक्षत हालत में मिले थे शव

इस हादसे में SUV में सवार तीन युवक और तीन युवतियों सहित कुल छह युवाओं की मौत हुई थी। सभी मृतकों की उम्र 19 से 24 साल के बीच थी। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों में से दो के सिर धड़ से अलग हो गए थे, वहीं एक युवती का सिर कार की छत से फट गया था। हादसे के बाद घटनास्थल पर जो हालात थे वे बहुत ही विचलित करने वाले थे। सड़क पर दूर-दूर तक मांस के लोथड़े व खून बिखरा हुआ था।

धनतेरस पर खरीदा था वाहन, नंबर भी नहीं आया था

मृतक जिस इनोवा वाहन में सवार थे उसे अक्टूबर महीने के आखिरी सप्ताह में धनतेरस पर मुहूर्त देखकर खरीदा गया था, और अभी तक उसका नंबर भी नहीं आया था। यह इनोवा अतुल अग्रवाल के नाम पर रजिस्टर्ड थी। अतुल के पिता सुनील अग्रवाल पटाखों के बड़े व्यापारी हैं और अतुल उनके साथ ही कारोबार में हाथ बंटाता था। हादसे के वक्त वह अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने के लिए निकला था।

रिपोर्ट में सड़क सुधार के ये सुझाव भी दिए गए

भविष्य में इस तरह के हादसों को होने से रोकने के लिए रिपोर्ट में सड़क सुधार के सुझाव भी दिए गए हैं। जिसके अनुसार चौराहों पर गति सीमा बोर्ड और स्पीड ब्रेकर लगाए जाने के लिए कहा गया। साथ ही सभी ट्रकों में अंडरराइड प्रोटेक्शन डिवाइस और रिफ्लेक्टर अनिवार्य करने को कहा गया है। रिपोर्ट में सावधानी से वाहन चलाने के लिए हरेक को जागरूक करने के लिए कहा गया है।

ओवरस्पीड वाहनों का चालान काटेगी पुलिस

उधर हादसे की रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य पुलिस ने भी तेज रफ्तार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। निर्धारित गति से ज्यादा रफ्तार में वाहन चलाते पकड़े जाने पर पुलिस अत्याधुनिक मशीनों से चालान काटेगी। जिलेभर में इंटरसेप्टर वाहनों, स्मार्ट कैमरों के साथ अब स्थानीय पुलिस को ओवरस्पीडिंग रोकने के लिए स्पीड रडार गन दे दी गई हैं। जिले में हाईवे और दुर्घटना आशंकित क्षेत्रों में तेज रफ्तार पर लगाम लगाने को पुलिस ने सख्ती की है। जहां अब तक तेज रफ्तार पर इंटरसेप्टर और स्मार्ट कैमरों से नजर रखकर कार्रवाई की जा रही थी तो वहीं अब पुलिस को स्पीड रडार गन दी गई है।

SSP अजय सिंह ने बताया कि दून में हाईवे पर वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए डोईवाला, ऋषिकेश, सहसपुर और विकासनगर पुलिस को स्पीड रडार गन उपलब्ध कराई गई है। जिसकी मदद से पुलिस अब तेज रफ्तार वाहनों को चिन्हित कर कार्रवाई कर सकेगी। उन्होंने बताया कि देहरादून में यातायात पुलिस फिलहाल तीन इंटरसेप्टर वाहनों और दो बुलेट बाइक में लगी स्पीड रडार गन व शहर में लगे चार स्मार्ट कैमरों से ओवरस्पीडिंग पर कार्रवाई कर रही है।

हादसे में हुई थी इन छह युवाओं की मौत

15 नवंबर को हुए हादसे में गुनीत पुत्री तेज प्रकाश सिंह, उम्र 19 वर्ष, कुणाल कुकरेजा पुत्र जसवीर कुकरेजा, उम्र 23 वर्ष, ऋषभ जैन पुत्र तरुण जैन, उम्र 24 वर्ष, नव्या गोयल पुत्री पल्लव गोयल, उम्र 23 वर्ष, अतुल अग्रवाल पुत्र सुनील अग्रवाल, उम्र 24 वर्ष, कामाक्षी पुत्री तुषार सिंघल, उम्र 20 वर्ष की मौके पर ही मृत्यु हो गई थी। जबकि सिद्धेश अग्रवाल पुत्र विपिन कुमार अग्रवाल, उम्र 25 वर्ष घायल हो गया था।

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लेखक के बारे में

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सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


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