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मन की चंचलता से निराश होने की जरूरत नहीं:पूनम दीदी

ब्रह्मा कुमारी के अलविदा तनाव और मेडिटेशन शिविर का चौथे दिन रविवार को इंदौर से आई पूनम दीदी ने आनंद उत्सव सत्र में कहा कि मन की चंचलता से निराश...

मन की चंचलता से निराश होने की जरूरत नहीं:पूनम दीदी
हिन्दुस्तान टीम,काशीपुरSun, 26 May 2024 05:00 PM
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ब्रह्मा कुमारी के अलविदा तनाव और मेडिटेशन शिविर का चौथे दिन रविवार को इंदौर से आई पूनम दीदी ने आनंद उत्सव सत्र में कहा कि मन की चंचलता से निराश होने की जरूरत नहीं है। बल्कि शांति के सागर परमपिता परमात्मा तथा परमधाम को जानकर मन को वहां ठिकाना दीजिए, तो मन शांत हो जाएगा। इसी का नाम योगाभ्यास है।
कहा कि आज कुछ लोग कहते हैं कि गरीबों को अन्न धन देना रोगियों के लिए औषधालय खोलने जैसा है। दूसरों की सेवा करना ही मनुष्य का कर्तव्य है, लेकिन इस विषय में ध्यान देने योग्य बात यह है कि गरीबों को अन्न धन आदि दान दिया जाता रहा है। रोगियों के लिए अस्पताल भी खोले जाते रहे हैं। दूसरों की सेवा भी समाज सेवक या पड़ोसी या श्रद्धालु लोग करते ही आए हैं, लेकिन फिर भी आज संसार में किस कर्तव्य की कमी है कि रोगियों से अस्पताल भरे पड़े हैं। नए-नए रोग लोगों को हो रहे हैं। करोड़ों लोग आज भी गरीब और लाचार हैं। दूसरों की रक्षा तथा सेवा के मोहताज हैं। आज जिस रफ्तार से अस्पताल बढ़ रहे हैं, उसी रफ्तार से जनसंख्या और रोगियों की संख्या भी बढ़ रही है। सर्वोत्तम सेवा तो वह सेवा है, जो मनुष्य को कर्तव्य, अकर्तव्य का ज्ञान देकर पुरुषार्थ, परायण, आत्मनिर्भर और सत्कर्म करने वाला कर्म योगी बनाए।

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