राज्य कर्मचारी का दर्जा देने का मुद्दा उठाया
जसपुर में ऐक्टू से जुड़े आशा हेल्थ वर्कर यूनियन के सम्मेलन में आशाओं ने राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और उनके श्रम का शोषण रोकने की मांग की। सम्मेलन में बबीता कश्यप को ब्लॉक अध्यक्ष चुना गया। नेताओं ने कहा कि सरकार आशा वर्कर्स के अधिकारों का उल्लंघन कर रही है और उन्हें न्यूनतम वेतन से वंचित किया जा रहा है।

जसपुर। ऐक्टू से संबद्ध आशा हेल्थ वर्कर यूनियन के ब्लॉक सम्मेलन में आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, आशाओं के श्रम का शोषण पर रोक लगाने की मांग की गई। साथ ही बबीता कश्यप को ब्लॉक अध्यक्ष चुना गया। सोमवार को हीरा गार्डन में हुए सम्मेलन में प्रदेश महामंत्री केके बोरा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें स्वास्थ्य विभाग के जमीनी स्तर के काम आशा वर्कर्स से कराती है। जबकि उनका काम किसी भी राज्य कर्मचारियों के काम से कम नहीं है। उसके बावजूद कई वर्षों से राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान करने की मांग को सरकार ने पूरा नहीं किया है।
नए लेबर कोड में भी आशाओं को श्रमिक नहीं माना गया है। इससे वह न्यूनतम वेतन पाने के हक से भी वंचित है। कहा कि आशा वर्कर्स सहित तमाम श्रमिक वर्ग के यूनियनबद्ध होने के अधिकार को भी मोदी सरकार द्वारा लाए गए नए लेबर कोड्स में खत्म कर दिया गया। इन लेबर कोड्स के लागू होने के बाद सरकार के झूठ का पर्दाफाश हुआ। जिला सचिव रीता कश्यप ने कहा कि ऐक्टू के नेतृत्व में बनी आशा हेल्थ वर्कर यूनियन ने आशा वर्कर्स की समस्याओं को सरकार के समक्ष रखने का काम किया है। जिला उप सचिव अनीता अन्ना ने कहा कि सरकार लगातार उनका शोषण कर रही है। इसके बाद बबीता कश्यप को पुन: ब्लॉक अध्यक्ष चुना गया। जबकि सतपाल सचिव, रेखा कोषाध्यक्ष, सुषमा संगठन मंत्री, गीता महामंत्री चुनी गई। जबकि रूपा देवी, बृजबाला देवी, विमला चौधरी, परमजीत, माया देवी, मिथलेश, गुरमीत, पूनम चौधरी, मीनाक्षी, नसरीन, नीतू, राधा, गीता सदस्य चुने गए। इस दौरान कुसुमलता, नीलम देवी, किरन, पुष्पा शर्मा, नईम जहां, फरीदा, आपदा, चरनजीत, रूपा, अर्चना, नीलम, माया रहे।
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