
‘तकनीक के साथ मानवीय विवेक और उत्तरदायित्व जरूरी’
-आईआईएम काशीपुर में हुआ अविन्या 2.0 का आयोजन काशीपुर, संवाददाता। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में
काशीपुर, संवाददाता। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) में आयोजित अविन्या 2.0 सम्मेलन में नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सतत प्रभाव जैसे विषयों पर गंभीर मंथन किया गया। शनिवार को हुए इस सम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों ने तकनीक के मानवीय और जिम्मेदार उपयोग पर बल दिया। उद्घाटन सत्र में आईआईएम के डीन (डेवलपमेंट) प्रो. कुणाल गांगुली ने कहा कि नवाचार को केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नेतृत्व की महत्वपूर्ण क्षमता के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्थानों को ऐसे नेता तैयार करने होंगे जो बदलाव का मार्गदर्शन कर सकें। आईआईटी रुड़की के डिज़ाइन विभाग के संयुक्त संकाय सदस्य प्रो. सप्तर्षि कोलाय ने कहा कि डिज़ाइन हमेशा उद्देश्य और प्रभाव के बीच की कड़ी रहा है।
उन्होंने बताया कि पुनर्जागरण काल से लेकर आज के एआई युग तक प्रगति तभी संभव हुई है, जब तकनीक ने मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखा। उत्सव चक्रवर्ती ने कहा कि एआई केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं, बल्कि बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाकर वास्तविक मूल्य सृजित करता है। माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट के प्रिंसिपल प्रोडक्ट मैनेजर पार्थ संगनानी ने गुणवत्ता और विवेक को आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। गूगल के वाइस प्रेसिडेंट अंशुमान सिंह ने कहा कि एआई प्रणालियों का विकास जवाबदेही के साथ होना चाहिए, ताकि समाज में विश्वास बना रहे।

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