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रोजेदारों को इफ्तार कराने पर भी मिलती है नेकी

अल्लाह के बंदों के लिए रमजान एक तोहफा है। इसमें जितनी भी नेकी जुटाई जाएंगी वह मोमिन के आखिरत के काम आएंगी। रमजान रहमत मगफिरत और निजात का महीना कहलाता है। रमजान में हर रोजे की अहमियत है। रमजान में इफ्तार करने के साथ इफ्तार करवाने की भी अपनी फजीलत है। अगर कोई शख्स किसी को इफ्तार कराता है तो उसे भी उतनी ही नेकी मिलेगी जितनी इफ्तार करने वाले को। रमजान में ऐसी तकरीरें नगर एवं देहात की मस्जिदों में उलेमा कर रहे हैं। रमजान की फजीलतें बता रहे हैं। हर साल रोजेदारों को कराते हैं इफ्तार समदर्शी संस्था के अध्यक्ष रहे डॉ. एमपी सिंह और संजय शर्मा हर साल रोजेदारों को रोजा इफ्तार कराते हैं। संजय शर्मा पूर्णानंद इंटर कॉलेज के पास किताबों की दुकान चलाते हैं। वह अपने खास मुस्लिम मित्रों को रोजा इफ्तार कराते हैं। वहीं कांग्रेसी नेता डॉ.एमपी सिंह भी अपने निवास पर सैकड़ों मुस्लिमों को पिछले कई सालों से रोजा इफ्तार कराते हैं। अभी नहीं हुई बड़ी रोजा इफ्तार पार्टी रमजान में छह रोजे आने के बाद भी अभी तक भी किसी बड़ी रोजा इफ्तार पार्टी का शहर में आयोजन नहीं हुआ है। पूरे साल के महीनों में सबसे महंगा महीना माने जाने वाले रमज़ान में मुस्लिम समुदाय के लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इसी क्रम में वह गरीब तथा अपने खास रोजेदारों को रोजा इफ्तार दावत भी देते हैं। रोजा इफ्तार से जहां एक ओर रोजा इफ्तार देने वाले को सवाब (पुण्य) मिलता हैं, वहीं दूसरी ओर आपसी भाईचारे को भी बढ़ावा मिलता है। लेकिन इस अभी शहर में बड़ी रोजा इफ्तार का दौर अभी शुरू नहीं हो सका। गरीब, बेवाओं को इफ्तार भेजना सवाबमदरसा बदरूलउलुम के प्रधानाचार्य मौलाना असीरूद्दीन बताते हैं कि प्यारे नबी मोहम्मद साहब रमजान में घर एवं मस्जिदे नबवी के दरवाजे बाबे जिब्रिल के बाहर दस्तरखान बिछाकर गरीब, मुसाफिर एवं बेसहारा रोजेदारों की इफ्तार कराते थे। इसी से प्रेरणा से इफ्तार कराने का सिलसिला शुरू हुआ। पिछले 20 साल पहले तक नगर के कई मोहल्लों में रोजेदार लोग अपने घरों के बाहर इफ्तारी का सामान लेकर बैठते थे। और आने जाने वाले रोजेदार एवं मुसाफिरों को रोजा इफ्तार कराते थे। उलेमा कहते हैं गरीब के घर इफ्तार पहुंचाना, मुसाफिर एवं बेवाओं को इफ्तार भेजना बेहद सवाब का काम है। रोजे में चुगलखोरी से बचेरोजे में परहेज सबसे अहम हिस्सा है। इसमें खाने-पीने से लेकर चुगलखोरी, पीठ पीछे बुराई, लड़ाई-झगड़ा आदि चीजों से परहेज करने को कहा गया है। रोजे में इबादत, नमाज, कुरआन की तिलावत, अल्लाह का जिक्र, हमदर्दी एवं गरीबों की मदद करना आदि शामिल है। नबी-ए-करीम मोहम्मद सल़ ने फरमाया है कि रमजान में कोई शख्स नेकी करता है तो अन्य दिनों के मुकाबले उसे 70 गुना ज्यादा नेकी मिलती है।

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