‘जिहादी ड्रग’ बनाने वाला संजय सिंह, रातों-रात अमीर बनने की चाहत में खड़ा किया सिंडिकेट; पूरी कुंडली
जिहादी ड्रग बनाने वाले संजय सिंह को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है कि रातों-रात अमीर बनने की चाहत में उसने खुद का सिंडिकेट खड़ा किया। दून की फैक्ट्री से 30 किलो जिहादी ड्रग की सप्लाई हुई थी।

देहरादून के सहसपुर में स्थित फैक्ट्री से हाल में 30 किलो जिहादी ड्रग (कैप्टागन) सप्लाई किए जाने के तथ्य प्रारंभिक जांच में मिले हैं। इससे पहले यहां से कब-कब नशीली दवा बनाकर भेजी गई, इसकी जांच की जा रही है। मामले में गिरफ्तार आरोपी संजय पिछले साल जून से बिना लाइसेंस के इस फैक्ट्री का संचालन कर रहा था। साल 2024 में भी संजय इसी फैक्ट्री में नकली दवा बनाने में गिरफ्तार हुआ था।
संजय ने बिजनौर के मूल निवासी हाल में रायपुर रोड, देहरादून के रहने वाले प्रदीप शर्मा से यह परिसर 35,000 रुपये प्रतिमाह की लीज पर लिया था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस फैक्ट्री के बाहर कोई साइनबोर्ड तक नहीं लगाया गया था। संजय ने दिखावे के तौर पर छह कर्मचारियों को काम पर रखा हुआ था, जिनमें चार महिलाएं शामिल थीं। इन महिलाओं और कर्मचारियों को केवल दिन में कुछ घंटों के लिए फैक्ट्री बुलाया जाता था, ताकि बाहर से ऐसा लगे कि यहां कोई सामान्य कामकाज हो रहा है।
रात में फैक्ट्री में होता था असली खेल
असल खेल रात के अंधेरे में शुरू होता था। जांच में सामने आया है कि जिहादी ड्रग तैयार करने के लिए गिरोह के कुछ खास और एक्सपर्ट लोग अक्सर रात में फैक्ट्री आते थे। एनसीबी की छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से 28 प्रकार के खतरनाक केमिकल सील किए गए हैं।
संजय की पूरी कुंडली
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की गिरफ्त में आया सहारनपुर के मुसकीपुर का निवासी 41 वर्षीय संजय कुमार रातों-रात अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर नहीं बना है। ‘जिहादी ड्रग’ (कैप्टागन) बनाने वाले इस सरगना का आपराधिक सफर नकली दवाओं की फैक्ट्री में एक मामूली कर्मचारी के रूप में शुरू हुआ था। पुलिस और एसटीएफ की जांच में इस शातिर अपराधी की पूरी क्राइम कुंडली खुलकर सामने आ गई है।
रातों-रात अमीर बनने की चाहत
एनसीबी और पुलिस की पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि संजय शुरुआत में सेलाकुई स्थित रेपोर्ट नाम की फैक्ट्री में काम करता था। इस फैक्ट्री का मालिक उस्मान था। करीब एक साल पहले जब पंजाब पुलिस ने उस्मान को नशे की दवाएं बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया तो यह गिरोह बिखर गया। रातों-रात अमीर बनने की चाहत में संजय ने अपना खुद का सिंडिकेट खड़ा करने की साजिश रची।
इसके लिए उसने उस्मान के पहले से तैयार नेटवर्क का उपयोग किया। जिसकी जड़ें पश्चिमी यूपी, एनसीआर तक फैली थीं। दिसंबर 2024 में सहसपुर पुलिस ने थाना क्षेत्र के लांघा रोड स्थित इसी ग्रीन हर्बल फैक्ट्री पर छापा मारकर संजय को उसके साथियों शिवकुमार, रहमान, कन्हैया लाल और ऋषभ जैन के साथ गिरफ्तार किया था। प्रतिबंधित दवा पकड़े जाने पर उस दौरान हर्बल फैक्ट्री का लाइसेंस भी रद हो गया। वर्ष 2024 में जेल जाने के बावजूद संजय के हौसले पस्त नहीं हुए। जेल से छूटकर आया तो फिर किराये पर वही परिसर हासिल किया। नकली दवाओं और सिरप के इस खेल से शुरू हुआ संजय का यह सफर विदेशी सिंडिकेट के साथ मिलकर कैप्टागन जैसी खतरनाक जिहादी ड्रग बनाने तक पहुंच गया।
जिसने सील कराई फैक्ट्री मालिक ने फिर उसे क्यों दी
मामले में सवाल फैक्ट्री मालिक पर भी उठ रहा है। वर्ष 2024 में नकली दवा के आरोप में सील होने के बाद फैक्ट्री मालिक ने एक अप्रैल 2025 को कोर्ट के आदेश से फैक्ट्री खुलवा ली थी। इसके महज दो महीने बाद ही बिना दोबारा यह परिसर किराये पर दे दिया। एसटीएफ अब फैक्ट्री मालिक से सख्ती से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है कि आखिर पहले नकली दवा बनाने वाले को मालिक ने फिर फैक्ट्री क्यों दी।
इसलिए कहा जाता है ‘जिहादी ड्रग’
जिहादी ड्रग इसलिए कहा जाता है क्योंकि आतंकी संगठन आईएस के लड़ाके इसका इस्तेमाल अधिक ऊर्जा, सहनशक्ति और डर कम करने के लिए करते रहे हैं। इसके सेवन से भूख, थकान और नींद कम लगती है।
2025 के नकली दवा केस में भी संदिग्ध भूमिका
एक जून 2025 में उत्तराखंड एसटीएफ ने सेलाकुई में फिर नकली दवाओं के एक अन्य बड़े मामले का भंडाफोड़ किया। इस केस की जांच में फिर से संजय की भूमिका संदिग्ध पाई गई। एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि नकली दवा के इस नए कारोबार में जो भुगतान किए गए थे वो संजय के जीएसटी पंजीकरण से भी जुड़े हैं। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि इस केस में संजय को आरोपी बनाया जा रहा है।
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