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उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर की होगी जांच, धामी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर की होगी जांच, धामी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

संक्षेप:

धामी सरकार शनिवार को उच्चस्तरीय बैठक में 2003 से अबतक परिवार रजिस्टर की जांच करवाने का फैसला लिया है। सरकार के नए फैसले से अब फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों को नियमानुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

Jan 03, 2026 04:46 pm ISTMohit लाइव हिन्दुस्तान
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उत्तराखंड में परिवार/कुटुंब रजिस्टर में पाई गई गंभीर अनियमितताओं पर सख्त एक्शन लिया गया है। धामी सरकार ने शनिवार को उच्चस्तरीय बैठक में 2003 से अबतक परिवार रजिस्टर की जांच करवाने का फैसला लिया है। सरकार ने ये फैसला परिवार रजिस्टर से जुड़े पंचायती राज विभाग के चौंकाने वाले आंकड़ों के बाद लिया है। कई आवेदन नियमों के उल्लंघन और अधूरे दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए।

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पंचायती राज विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक साल 2025 में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाओं के लिए प्रदेशभर में 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन आए जिनमें से 2,60,337 आवेदन स्वीकृत और 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन और अधूरे दस्तावेजों के वजह से निरस्त किए गए।

कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा

सीएम धामी ने बैठक में राज्य स्तर पर व्यापक, निष्पक्ष, तय समय पर जांच और फर्जीवाड़ा करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी जिलों में उपलब्ध परिवार/कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिला अधिकारी (DM) के पास सुरक्षित रखी जाएं, जिससे रिकॉर्ड में किसी भी तरह की छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो। साथ ही, परिवार रजिस्टरों की गहन जांच CDO/ADM स्तर पर कराए जाने का निर्णय लिया गया। सरकार के नए फैसले से अब फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों को नियमानुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को हासिल है, जबकि अपील का अधिकार उप जिलाधिकारी (SDM) के पास निहित है। वर्तमान में परिवार रजिस्टर से संबंधित सेवाएं ‘अपणी सरकार पोर्टल’ के जरिए उपलब्ध कराई जा रही हैं।

सरकार के नए फैसले से अब फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों को नियमानुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

इलाकों में अनधिकृत बसावट

बैठक में इसबात पर भी ध्यान दिया गया कि बीते कुछ साल में राज्य की सीमा से लगे मैदानी जनपदों के ग्रामीण इलाकों में अनधिकृत बसावट हुई है। बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। ऐसे में सरकार द्वारा परिवार रजिस्टर से संबंधित नियमावली में कुछ संशोधन की जरूरत महसूस की गई है।

Mohit

लेखक के बारे में

Mohit
मोहित ने पत्रकारिता की पढ़ाई देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान आईआईएमसी दिल्ली से की है। 2016 में डिजिटल मीडिया डेब्यू। अमर उजाला से शुरुआत फिर एनडीटीवी और जनसत्ता से होकर अब लाइव हिंदुस्तान में बतौर डिप्टी कंटेट प्रोड्यूसर पद पर कार्यरत। स्पोर्ट्स की वेब स्टोरीज कवर करते हैं। पॉलिटिक्स में दिलचस्पी रखते हैं। खाली समय में गेम खेलना और खाना पसंद है। और पढ़ें

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