30 साल में 7वीं बार लिपुलेख और कालापानी पर संग्राम, नेपाल के बयान से फिर तल्खी; क्या कहते हैं एक्सपर्ट
नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह ने एक बार फिर कालापानी और लिपुलेख पर बयान देकर विवाद को हवा दी है। उन्होंने कहा कि उनके पास इसके सबूत हैं। 30 साल में इस मुद्दे पर सात बार विवाद हो चुका है।

भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख-कालापानी सीमा विवाद एक बार फिर गर्मा गया है। पिछले तीन दशकों में यह सातवां मौका है जब इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच राजनयिक असहजता पैदा हुई है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के हालिया बयान से पड़ोसी देशों के रोटी-बेटी के रिश्तों में एक बार फिर खटास पैदा होने की स्थिति बन गई है। बालेंद्र शाह ने हाल में लिपुलेख और कालापानी पर दावा किया और कहा कि हमारे पास इसके सबूत हैं।
पीएम बालेंद्र शाह के रविवार को काठमांडू में लिपुलेख-कालापानी को लेकर दिए बयान के बाद फिर बहस छिड़ गई है। लेकिन यह विवाद कोई पहला नहीं है। बल्कि 1998 में बड़े स्तर पर कालापानी को लेकर मामला गहराया था। तब नेपाल ने कालापानी से भारतीय सैनिकों को हटाने की मांग की थी।
2015 और 2019 में भी भिड़ चुका नेपाल
साल 2015 में भारत-चीन ने मानसरोवर यात्रा के लिए एक ट्रांजिट पॉइंट के रूप में इस मार्ग को विकसित करने की बात कही थी। तब भी नेपाल ने इस पर खुलकर कड़ा विरोध जताया। वर्ष 2019 में नेपाल ने नक्शा जारी कर लिपुलेख, कालापानी को अपना दिखाया था। वर्ष 2020 में लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली सड़क के उद्घाटन के बाद भी नेपाल ने सीमा विवाद खड़ा किया। उसी वर्ष नेपाल ने आधिकारिक राजनीतिक नक्शा जारी कर दिया, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपने हिस्से में दिखा दिया था।
पीएम बालेंद्र ने नेपाल का भी कब्जा बताया था
पिछले महीने ही नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने एक बयान देते हुए कहा था कि भारत के साथ ही नेपाल ने भी कई जगहों पर सीमावर्ती इलाकों में कब्जा जमाया है। इसके बाद उनकी नेपाल में काफी किरकिरी हुई थी। अब रविवार को दिए बयान से दोबारा सामरिक हलचल तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का क्या कहना है
इस मामले विशेषज्ञों की अपनी राय है। नेपाल में अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ एमपी जोशी का कहना है कि विवाद दशकों पुराना है। दोनों देशों की सर्वे टीम ने हाल ही में बैठक भी की थी। अब जरूरत है कि दोनों देश अपने पुराने नक्शे सर्वे टीम के सामने रखें। मिलान के आधार पर सीमा विवाद खत्म करने के लिए आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र चंद 'देवा' कहते हैं कि दोनों देशों को सीमा विवाद का मिलकर हल निकालना चाहिए। दोनों देशों में सीमा स्तंभों पर भी रार है। 30 सालों से नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद का एक कारण टेरीटरी भी है। सर्वे टीम इसे सुलझा सकती हैं।


