
आपदा के अंधेरे में उगा उम्मीदों का सूरज, उत्तरकाशी में तेज हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
आपदा के अंधकार में डूबे उत्तरकाशी में गुरुवार को उम्मीदों का सूरज उगा। मौसम साफ होते ही राहत और बचाव कार्यों ने तेजी पकड़ी और लोगों को आपदा प्रभावित क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
उत्तरकाशी के धराली को जलप्रलय गहरा जख्म दे गई, लेकिन गुरुवार की सुबह आपदा प्रभावितों के लिए कुछ राहत लेकर आई। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, आईटीबीपी समेत अन्य एजेसियां 24 घंटे रेस्कयू ऑपरेशन में जुटी हैं। एक तरफ अस्थाई पुल तैयार हो रहे हैं तो दूसरी ओर मलबा हटाने का काम शुरू हो गया है। स्निफर डॉग मलबे में दबी जिंदगियों की तलाश में जुट गए हैं। अफसरों ने घटनास्थल पर डेरा डाल लिया और हर गतिविधियों पर बारीकी से मॉनीटरिंग की जा रही है।

रेस्क्यू ऑपरेशन में आई तेजी
उत्तरकाशी के धराली में आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य जोरों पर हैं। राज्य सरकार और विभिन्न एजेंसियों की टीमों ने प्रभावित क्षेत्रों में डेरा डाल दिया है। गंगोत्री हाईवे पर भटवाड़ी और गंगनानी के बीच करीब 50 मीटर का हिस्सा टूट गया था, जिससे वाहन बीच रास्ते में फंस गए थे। बीआरओ ने इसे दुरुस्त कर दिया है। इससे यहां गुरुवार को यातायात बहाल हो गया। प्रशासन ने आपदा प्रभावितों के लिए राशन व पशुओं के लिए भी चारे की व्यवस्था की है।
अधिकारियों ने बताया कि जेसीबी, क्रेन और जनरेटर मौके पर पहुंचा दिए गए हैं। एसडीआरएफ आईजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए टावर लगाए जा रहे हैं। सेना और वायु सेना के हेलीकॉप्टर आवश्यक सामग्री और लोगों को पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।
आईएसएस अधिकारी एक दिन का वेतन देंगे
उत्तराखंड के आईएएस अधिकारी एक दिन का वेतन उत्तरकाशी आपदा के पीड़ितों की मदद के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में देंगे। आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष एलए फैनई की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।
चिनूक से धराली भेजा गया जनरेटर
रेस्क्यू ऑपरेशन में चिनूक हेलीकॉप्टर ने भी मोर्चा संभाल लिया है। गुरुवार को चिनूक से 125 केवि का एक जनरेटर आपदा प्रभावित धराली भेजा गया। बता दें कि धराली क्षेत्र में बिजली और संचार की सेवा ठप है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कत आ रही है। धराली में संचार सेवा भी ध्वस्त है। इससे वहां संपर्क भी नहीं हो पा रहा है। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पाडेय ने बताया कि 125-125 केवि के दो जनरेटर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंच थे। एक जनरेटर को लेकर गुरुवार को जौलीग्रांट से चिनूक धराली के लिए रवाना हुआ। जनरेटर के माध्यम से आपदा प्रभावित क्षेत्र में संचार और बिजली की आपूर्ति वैकल्पिक तौर पर बहाल की जाएगी।
धराली, हर्षिल में घायलों का इलाज
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने धराली और हर्षिल में आपदा की वजह से घायल 70 से अधिक मरीजों का इलाज किया। वहीं, पांच गंभीर घायलों को एम्स ऋषिकेश और एमएच देहरादून रेफर किया गया है।स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि मंगलवार शाम को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हर्षिल में तैनात डॉक्टर को धराली भेजा गया था। बुधवार से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी धराली और हर्षिल में कैंप कर रही है। उन्होंने बताया कि हादसे की वजह से कई लोग अवसाद की स्थिति में हैं, जिनकी काउंसलिंग कराई जा रही है। इसके लिए तीन मनोचिकित्सकों की टीम आपदा प्रभावित क्षेत्र में भेजी गई है।
चिन्यालीसौड़ में रहेंगे हेलीकॉप्टर
राहत कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए चिनूक तथा एमआई-17 को अब चिन्यालीसौड़ में ही तैनात किया जाएगा। अब तक ये जौलीग्रांट हैंगर पर रुक रहे थे। मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने कहा कि दून से हेलीकॉप्टर को आने में अतिरिक्त समय लग रहा है। चिन्यालीसौड़ में रहने से इस समय को कम किया जा सकेगा। बता दें कि बुधवार तक मौसम खराब होने के कारण उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित क्षेत्र में रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी नहीं पकड़ पा रहा था। खराब रास्तों के कारण धराली और हर्षिल तक पहुंचने में अब भी बाधा आ रही है। गुरुवार को मौसम साफ होते ही रेस्क्यू अभियान ने तेजी पकड़ी।

लेखक के बारे में
Anubhav Shakyaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


