
फरवरी-अप्रैल में गिर रही ज्यादा बर्फ, बदला बर्फबारी पैटर्न; हिमालय को बड़ा खतरा
वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के शोध के अनुसार, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी का पैटर्न बदला है, जहाँ दिसंबर-जनवरी की तुलना में अब फरवरी से अप्रैल के बीच अधिक बर्फ गिर रही है, जो गर्मी से तुरंत पिघलकर ग्लेशियरों के लिए गंभीर जल संकट और खतरा पैदा कर रही है।
उच्च हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी का पैटर्न बदल रहा है। दिसंबर, जनवरी से ज्यादा बर्फ फरवरी, मार्च और अप्रैल में गिर रही है। कुमाऊं के कफनी और पिंडारी ग्लेशियर घाटियों में पिछले सालों के आंकड़ों का अध्ययन कर वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने ये निष्कर्ष निकला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनियाभर में बढ़ते तापमान ने पश्चिमी विक्षोभ की चाल बिगाड़ दी है। इसके चलते हिमालय में सर्दियों की तुलना में गर्मियों में ज्यादा बर्फ गिर रही है।
जर्मनी के शोध पत्र ‘एप्लाइड जियोमेटिक्स’ में प्रकाशित वाडिया के इस ताजा शोध के मुताबिक, सेंट्रल हिमालय में एक हजार से दो हजार मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और तापमान के पैटर्न में बदलाव हुआ है। तीन हजार से चार हजार मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों में भी स्नो कवर का ट्रेंड बदला है। अब हिमालय में गर्म दिनों में ज्यादा बर्फबारी हो रही है, लेकिन बेवक्त हो रही ये बर्फबारी हिमालय के लिए कारगर साबित नहीं हो रही है। क्योंकि गर्मी के कारण ये तेजी से पिघल भी जा रही है। सर्दियों में अब बर्फबारी की जगह केवल बारिश हो रही है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इससे ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ सकती है और हिमालय में बर्फ की जमावट में भारी कमी आ सकती है।
जलसंकट का करना पड़ सकता है सामना
वैज्ञानिकों के मुताबिक बर्फबारी के इस पैटर्न से भविष्य में बड़ा जल संकट पैदा कर सकता है। शोध में ग्लेशियरों की स्थिति पर सेटेलाइट निगरानी और फील्ड स्टडी में जुटाए गए आंकड़ों में भी अंतर पाया गया है। शोध में प्रेरी व्यू यूनिवर्सिटी यूएसए के प्रो.राम एल रे, सिम्बोसिस अंतरराष्ट्रीय यूनिविर्सिटी के सहायक प्रो.डॉ.धर्मवीर सिंह, कियो यूनिवर्सिटी जापान के प्रो.राजीब शॉ आदि ने सहयोग दिया है। ताजा शोध नतीजों को ग्लेशियोलॉजी, हाइड्रोलॉजी, क्लाइमेटोलॉजी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान डॉ.पंकज चौहान ने कहा, उच्च हिमालय में बर्फबारी में विरोधाभास है। अब फरवरी से अप्रैल के बीच भी बर्फबारी हो रही, जबकि ये वक्त गर्मी शुरू होने से ठीक पहले का है। इसका असर ये है कि बर्फबारी के साथ उसी गति से मेल्टिंग भी हो रही है। शोध में दिसंबर में सबसे कम और अप्रैल में सर्वाधिक स्नोफॉल-स्नो कवर एरिया दर्ज किया गया।

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Anubhav Shakyaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




