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ऊं परमात्मा का सबसे समीपवर्ती नाम

ऊं परमात्मा का सबसे समीपवर्ती नाम

जगद्गुरु आश्रम कनखल की यज्ञशाला में दक्षिण भारत से आए विद्वान आचार्यों ने पाशुपत महाचंडी यज्ञ का आयोजन किया। भक्तों ने यज्ञ में आहुतियां डालकर विश्व और मानव कल्याण की कामना की। यज्ञ यज्ञाचार्य रामानंदनाथा कालीदास याजी श्री विद्या सर्व मंगलापीठ के पीठापति ने संपन्न कराया।शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि आद्य शंकराचार्य के अनुसार ऊँ परमात्मा का सबसे समीपवर्ती नाम है। इसका निरंतर उच्चारण करने से परमात्मा प्रसन्न होते हैं। ऊँ शब्द का जन, मनन और यज्ञ करने से परमात्मा की सर्वोत्तम उपासना है। आद्य शंकराचार्य ने इस श्रीविद्या का ज्ञान समग्र संसार को दिया। कहा कि मनुष्य योनि परमात्मा की श्रेष्ठतम कृति है। मनुष्य से श्रेष्ठ अन्य कोई प्राणी नहीं है। मनुष्य की श्रेष्ठता विवेक के कारण है। विवेक शक्ति से ही श्री विद्या की प्राप्ति होती है। मनुष्य में ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त करने की सामर्थ्य है। सौभाग्य से वेदज्ञ और ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरु मिल जाए तो मनुष्य पूर्णास्व को प्राप्त कर सकता है। स्वामी भागवत आश्रम ने भी विचार व्यक्त किए।

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