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गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय में उपनयन संस्कार का आयोजन

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गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय में 117 साल उपनयन संस्कार परम्परा को वैदिक मंत्रों के साथ अमृत वाटिका परिसर में स्थित यज्ञशाला में मनाया गया। यह परम्परा स्वामी श्रद्धानन्द ने गुरुकुल के शुरुआत के दौर से शुरू की थी। इस परम्परा को आज भी वैदिक संस्कार पद्धति के साथ मनाया जाता है।

इस अवसर पर विद्यालय विभाग के मुख्याधिष्ठाता डा. दीनानाथ शर्मा ने ब्रह्मचारियों को जीवन में उच्चता के साथ-साथ श्रेष्ठ जीवन बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि परिश्रम जीवन का वह पक्ष है जो मनुष्य को सफलता प्रदान करता है। हम सभी ने श्रेष्ठ आचार्यों के संरक्षण में रहकर विद्या का उपार्जन किया है। सहायक मुख्याधिष्ठाता डा. नवनीत परमार ने कहा कि गुरुकुल की वाटिका में ब्रह्मचारियों को यह संस्कार सम्पूर्ण जीवन में नवीन ज्ञान परम्परा के साथ जोड़ने में प्रेरित करता है।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य डा. विजेन्द्र शास्त्री ने कहा कि संस्कारों से ओत-प्रोत कर ब्रह्मचारियों को आर्य समाज के नियमों का पाठ पढ़ाया जाता है। यज्ञ के ब्रह्मा डा. योगेश शास्त्री ने कहा कि गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने संस्कृत, हिन्दी व अंग्रेजी भाषाओं में श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबन्धन एवं स्वतंत्रता दिवस के महत्व को वाचित किया। ब्रह्मचारी दिनकर भगत हार्दिक, मयंक शर्मा, आर्यन, सागर, अविरल, प्रणव, गगन, गगन कुमार, तुषार, निशान्त, नैतिक व पर्व इत्यादि ब्रह्मचारियों ने वैदिक परम्परा के साथ उपनयन संस्कार किया।इस अवसर पर डा. अशोक कुमार आर्य, डा. हुकम सिंह, डा. जितेन्द्र वर्मा, वेदपाल आर्य, डा. बृजेश, डा. अश्वनी, अमर सिंह, अशोक, राजकमल, राजकुमार, सज्जन, धीरज कौशिक, धर्म सिंह, अमित आदि उपस्थित रहे।

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  • Web Title: Upanayan ceremony organized in Gurukul Kangri school