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4 अगस्त, 2020|2:23|IST

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मरीजों के इलाज में प्रदेश सरकार बन रही है रोड़ा: आइएमए

मरीजों के इलाज में प्रदेश सरकार बन रही है रोड़ा: आइएमए

क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट ऐक्ट को लेकर प्रदेश सरकार के रवैये को निजी चिकित्सकों ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। निजी चिकित्सकों ने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के मद्देनजर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट ऐक्ट के मानकों को पूरा करना असंभव है। इसके बावूजद सरकार क्लीनिकों और अस्पतालों पर ऐक्ट को लागू करने को लेकर दबाव बना रही है।

चिकित्सकों ने कहा कि कि ऐक्ट में संशोधन न होने तक क्लीनिक और अस्पताल नहीं खुलेंगे। शुक्रवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में आइएमए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विपिन मेहरा ने मरीज सरकारी अस्पतालों अधिक निजी क्लीनिक और अस्पतलों पर भरोसा करते हैं। छोटे अस्पताल मरीजों को सस्ते इलाज की सहूलियत के साथ लोगों को रोजगार भी देते हैं। लेकिन क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट ऐक्ट के चलते निजी अस्पताल और क्लीनिक स्वत: बंदी को मजबूर हैं। आइएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. जसप्रीत सिंह ने कहा कि सरकार ने ऐक्ट में बदलाव का आश्वासन दिया था। लेकिन अब सरकार ऐक्ट को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए तैयार नहीं है। एक्शन कमेटी के सदस्य डॉ. संजय शाह ने कहा कि के मानकों को पूरा नहीं किया जा सकता है। इसलिए उन्हें अस्पतालों और क्लीनिकों को बंद करना पड़ा। डॉ. शाह ने कहा कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट ऐक्ट के चलते चिकित्साकर्म से जुड़े प्रत्येक प्रभावित होंगे। आइएमए के कोषाध्यक्ष डॉ. विकास दीक्षित ने कहा कि सरकारी अस्पताल में स्वयं मानकों को पूरा नहीं कर सकते हैं। निजी चिकित्सकों ने कहा कि जब तक सरकार ऐक्ट में संशोधन नहीं करती है तब तक अस्पताल और क्लीनिक बंद रहेंगे।

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  • Web Title:The state government is in the process of treating patients Barua IMA