सद्भावना यात्रा के बाद संत और गंगा सभा आमने-सामने

Newswrap हिन्दुस्तान, हरिद्वार
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हरिद्वार में रविवार को मुस्लिम सद्भावना यात्रा के बाद गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम और संत रामविशाल दास के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। रामविशाल दास ने गौतम पर गंभीर आरोप लगाए और उनकी बर्खास्तगी की मांग की। यात्रा के आयोजकों ने गंगा सभा से माफी मांगी है, जबकि रामविशाल दास ने खुद को आयोजकों के आग्रह पर शामिल बताया।

सद्भावना यात्रा के बाद संत और गंगा सभा आमने-सामने

शहर में रविवार को निकाली गई मुस्लिम सद्भावना सम्मान यात्रा के बाद गंगा सभा के अध्यक्ष और संत रामविशाल दास महाराज के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम की ओर से कालनेमि बताए जाने के बाद संत रामविशाल दास ने प्रेस क्लब पहुंचकर पत्रकार वार्ता करते हुए पलटवार किया। उन्होंने गंगा सभा के अध्यक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए। साथ ही नितिन गौतम और दूसरे तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित को गंगा सभा से बर्खास्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि तीन दिन बाद इसी मुद्दे को लेकर संतों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें चर्चा की जाएगी।

जब तक मांगें पूरी नहीं होगी, विरोध जारी रहेगा। उधर, यात्रा के आयोजकों ने श्री गंगा सभा से माफी मांग ली है। रामविशाल दास ने बताया कि कि उन्होंने यात्रा का आयोजन नहीं किया, बल्कि आयोजकों के आग्रह पर संत होने के नाते शामिल हुए थे। मुस्लिम यात्रा के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासन की अनुमति ली गई थी। मुस्लिम धर्म छोड़ने के बाद उनकी जान को खतरा है, इसलिए पुलिस-प्रशासन ने उनको सुरक्षा मुहैया कराई। वो अनुमति लेकर ही हरिद्वार आए थे। पुलिस-प्रशासन ने गंगा सभा को रविवार सुबह ही सूचित किया था। हरकी पैड़ी पर व्यवस्थापक कुलदीप विद्यार्थी ने माइक से कहा था कि यदि यहां के कोई नियम-कानून हैं तो उससे अवगत कराएं। वहां के कर्मचारियों ने ही यात्रा में शामिल लोगों के जूते उतरवाए लेकिन टोपी नहीं उतरवाई। टोपी पहने दो लोगों ने आचमन करके टोपी उतार ली थी। रामविशाल दास ने कहा कि वो संत, गंगा सभा के लिए नहीं बने हैं वो सनातन धर्म, परंपरा के लिए संत बने हैं। उन्हें कालनेमि बताकर संत परंपरा और रामानंदी परंपरा को आहत किया है। वहीं, श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम का कहना है कि रविवार को हुए विवाद के बाद यात्रा के आयोजकों ने उनसे संपर्क कर अपना माफीनामा उन्हें भेज दिया है। इसके बाद गंगा सभा की ओर से मामला समाप्त हो गया। हालांकि रामविशाल दास जो कह रहे हैं उसका कोई मतलब नहीं है। वे जो भी कार्रवाई करना चाहते हैं उसके लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

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