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पूर्वोत्तर में एलोवेरा की खेती की प्रबल संभावना

पूर्वोत्तर में एलोवेरा की खेती की प्रबल संभावना

मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री जोरमथांगा ने मंगलवार पतंजलि योगपीठ पहुंचकर आचार्य बालकृष्ण से मुलाकात की। पूर्व मुख्यमंत्री ने मिजोरम में जड़ी-बूटी की खेती की संभावनाओं पर विचार विमर्श किया।

जोरमथांगा ने कहा कि पतंजलि पूर्वोत्तर में तेजी से विस्तार कर रहा है, जिससे किसानों में एक आस जगी है। मिजोरम में किसानों की स्थिति खराब है। किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है। जिससे वे आत्महत्या करने को विवश हैं। ऐसे में मिजोरम का किसान पतंजलि से आस लगाये हुए है। जोरमथांगा ने आचार्य से आग्रह किया कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए यथासंभव सहयोग करें।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि का प्रथम ध्येय कृषकों का हित है। मिजोरम में किसानों की दशा सुधरने के लिए पतंजलि हर संभव सहयोग करेगा। पूर्वोत्तर की मिट्टी औषधीय जड़ी-बूटियों की खेती के लिए उपयुक्त है तथा वहां ऐलोवेरा की खेती की प्रबल संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि ऐलोवेरा एंटीबायोटिक व एंटी फंगल है। ऐलोवेरा का उपयोग कॉस्मेटिक उत्पाद, हर्बल उत्पाद, जूस, पल्प तथा दवाओं में किया जाता है।

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  • Web Title:Strong expectancy of aloe vera in the north east