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31 अक्तूबर, 2020|4:38|IST

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सिडकुल के श्रमिकों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया

मांगों को लेकर सिडकुल के विभिन्न श्रमिक संगठन मुखर हो गए हैं। गुरुवार को विभिन्न कंपनियों के कर्मचारियों ने यूनियनों के बैनर तले चिन्मय डिग्री कालेज से जिलाधिकारी कार्यालय तक रैली निकाल कर प्रदर्शन किया। उपजिलाधिकारी को ज्ञापन देकर कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने, उत्पीड़न पर रोक लगाने और श्रम कानूनों का पालन कराने की मांग की। चेताया कि श्रम कानूनों का अनुपालन नहीं होने पर उग्र आन्दोलन शुरू कर दिया जाएगा।श्रमिक नेता अश्वनी कुमार और पंकज कुमार ने कहा कि सिडकुल में श्रम कानूनों का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है। आठ घंटे कार्य दिवस व्यवहार में समाप्त कर दिया गया है। कर्मचारियों से न्यूनतम वेतन पर 12 घंटे काम लेकर उत्पीड़न और शोषण किया जा रहा है। 12 घंटे काम करने के बाद भी पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा है। ठेकेदारी प्रथा ने कामगारों की रीढ़ की हड्डी तोड़ कर रख दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद कर्मचारियों की वेतन वृद्धि नहीं जा रही है। ठेका प्रथा के मजदूरों से स्थाई कर्मचारियों की तरह काम लिया जा रहा है। विरोध करने पर कर्मचारियों को जबरन निकाला जा रहा है। श्रमिक नेताओं ने कहा कि श्रम विभाग में शिकायत करने के बावजूद समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है। कई कारखानों ने नया वेतन लागू तो कर दिया, लेकिन कर्मचारियों के ग्रेड घटा दिए हैं। स्थानीय स्तर पर भी कामगारों की समस्या का कोई समाधान नहीं है। कहा कि कंपनियों में ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किया जाना चाहिए। कर्मचारी नेताओं ने न्यूनतम वेतन लागू करने, पीएफ अंशदान काटने, उचित अनुपात में वेतन वृद्धि करने, श्रम कानूनों का पालन, कारखानों में लंबित वेज रिवीजन लागू कर समस्याओं का निराकरण करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में इस दौरान गोविंद सिंह, अश्वनी कुमार, किशोर बिष्ट, फरवेंद्र चौधरी, राजकिशोर, पंकज कुमार, राजेश कुमार, देवेंद्र कुमार, बृजेश कुमार, महेंद्र राणा, हरीश लाल, राजकुमार राणा, जसवंत सिंह, जितेंद्र कुमार, रमेश बिष्ट, उमेश कुमार आदि उपस्थित रहे।