
वरिष्ठ नागरिकों ने की आयोग गठन-पेंशन बढ़ाने की मांग
संक्षेप: वरिष्ठ नागरिक सामाजिक संगठन ने उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती पर सरकार की वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा पर दुख जताया। अध्यक्ष चौ. चरण सिंह ने कहा कि सरकार को वृद्धजनों के योगदान का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने केरल की तर्ज पर वरिष्ठ नागरिक आयोग की स्थापना और वृद्ध आश्रम के निर्माण की मांग की।
वरिष्ठ नागरिक सामाजिक संगठन ने उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती पर राज्य के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा पर गहरा दुख व्यक्त किया है। संगठन के अध्यक्ष चौ. चरण सिंह ने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलन और चुनावों में वरिष्ठ नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, लेकिन रजत जयंती जैसे ऐतिहासिक अवसर पर सरकार ने उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को वरिष्ठ नागरिकों के योगदान का सम्मान करते हुए उनके हित में ठोस कदम उठाने चाहिए। इस मौके पर गठन ने मांग की है कि केरल की तर्ज पर उत्तराखंड में भी वरिष्ठ नागरिक आयोग की स्थापना की जाए, ताकि वृद्धजनों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

साथ ही सलेमपुर में प्रस्तावित वृद्ध आश्रम को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाकर शीघ्र निर्माण कार्य शुरू किया जाए। संगठन ने बताया कि 2007 अधिनियम के अंतर्गत वृद्धजनों को कानूनी सहायता देने का प्रावधान तो है, परंतु व्यवहार में उन्हें न्याय पाने के लिए अदालतों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त न्यायालय गठित करने की मांग की। संगठन के अध्यक्ष चौधरी चरण सिंह ने कहा कि जहां राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन में ₹1000 से ₹10,000 तक की वृद्धि स्वागत योग्य है, वहीं वृद्धा, विधवा और विकलांग पेंशन मात्र ₹1500 मासिक है, जिसे हरियाणा और राजस्थान की तरह ₹3200 किया जाए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में पेयजल मूल्य पर प्रतिवर्ष 15% की बढ़ोतरी आम जनता और वरिष्ठ नागरिकों के लिए आर्थिक बोझ बन गई है। संगठन ने सरकार से पेयजल दरों में कमी और वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की है। इस मौके पर ताराचंद, विद्यासागर, बाबू दयाल, हरदयाल अरोड़ा, एससीएस भास्कर, श्याम सिंह, प्रेम भारद्वाज, रामसागर, सुभाष चंद्र ग्रोवर, शिवचरण, शिवकुमार आदि वरिष्ठ नागरिक हैं।

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