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गाय और गंगा को लेकर संतों ने जताई चिंता

संतों का कहना है कि कानून बनाकर ही गोहत्या को रोका जा सकता है। केंद्र सरकार को इस मामले में संतों ने कानून बनाने का सुझाव दिया है। गोहत्या के अपराधी को आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान कानून में होना चाहिए। गुरुवार को विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल की दूसरे दिन की बैठक में गोमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। एक अन्य प्रस्ताव में गंगा को प्रदूषण मुक्त कर अविरल, निर्मल बनाने और हिन्दू मठ-मन्दिरों व धर्मस्थलों के सरकार के अधिग्रहण पर विरोध जताया गया। संतों के बीच श्रीमहंत फूलडोल बिहारी दास ने गोरक्षा को लेकर प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि भारत में गोहत्या पूर्णरूप से प्रतिबंधित होनी चाहिए। देश में अनेक राज्यों में गोहत्या के कानून पर्याप्त कड़े न होने के कारण आरोपी कानून से बचने का मार्ग निकाल लेते हैं। एक अन्य प्रस्ताव में संतों ने गंगा के निरन्तर प्रदूषित होकर इसके जल के आचमन योग्य न रहने पर चिन्ता जाहिर की। संतों ने कहा कि गंगा के गंगत्व की हर हालत में रक्षा होनी चाहिए। संतों ने बांध बनाने पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग की। इससे पहले संतों का स्वागत विहिप के कार्याध्यक्ष डॉ. प्रवीणभाई तोगड़िया, संगठन महामंत्री दिनेशचन्द्र, महामंत्री चम्पतराय ने किया। संचालन विहिप के उपाध्यक्ष जीवेश्वर मिश्र ने किया। बैठक में देश भर से आये संतों में प्रमुख रूप से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि, महंत रविंद्र पुरी, महंत देवानन्द, स्वामी हंसदेवाचार्य, स्वामी गोविन्ददेव गिरि, स्वामी दिनेश भारती, महामण्डलेश्वर रामशरण दास, संत दिलीप सिंह, स्वामी अतुल कृष्ण, श्रीमहंत रामेश्वर दास, महंत नवलकिशोर दास, श्रीमहंत प्रेमदास, श्रीमहंत अमृतराम, श्रीमहंत रामकृष्ण दास, आचार्य अविचलदास, स्वामी विवेकानन्द सरस्वती, श्रीमहंत राम मनोहर दास, डॉ. विलुपाक्ष स्वामी, स्वामी जितेन्द्र नाथ, स्वामी हरिभक्त पारायण माधव, स्वामी प्रसाद राजस्वामी, स्वामी जितेन्द्र नाथ प्रधानी, स्वामी चरणनरजारी, स्वामी श्यामानन्द ब्रह्मचारी, स्वामी गुरुपदानन्द, स्वामी कृपानन्द पुरी, स्वामी जीवनमुक्तानन्द पुरी, स्वामी भास्कर तीर्थ, महंत महादेव दास, महंत विमलशरण, महंत बालकदास, महंत जगन्नाथ दास, बौद्ध गुरु कर्मचार्य आदि उपस्थित थे। चढ़ावे की राशि आध्यात्मिक शिक्षा पर खर्च होएक प्रस्ताव में संतों ने कहा कि सरकार हिन्दू धर्मस्थानों के पुजारियों, तीर्थ पुरोहितों और अन्य सेवा कर्मियों के योगक्षेम की चिन्ता करे। इन मठ मन्दिरों में हिन्दू समाज के चढ़ावे से जो राशि प्राप्त होती है, उसका व्यय संस्कृत, वेद तथा आध्यात्मिक शिक्षा पर, गोशाला की व्यवस्था पर तथा गरीब हिन्दू बच्चों की शिक्षा व मठ मन्दिरों के विकास पर ही होना चाहिए।

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  • Web Title:Saints worry about cow and Ganga