धार्मिक शिक्षा के लिए मान्यता की जरूरत नहीं: मौलाना आरिफ

Newswrap हिन्दुस्तान, हरिद्वार
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हरिद्वार के मदरसा दारुल उलूम रशीदिया के प्रबंधक मौलाना मोहम्मद आरिफ ने कहा कि धार्मिक शिक्षा के लिए मान्यता जरूरी नहीं है। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए मदरसों को शिक्षा बोर्ड से बाहर रखने की मांग की। इस दौरान मदरसों के खिलाफ गलतफहमियों और षड्यंत्रों पर चर्चा की गई।

धार्मिक शिक्षा के लिए मान्यता की जरूरत नहीं: मौलाना आरिफ

हरिद्वार, संवाददाता। मदरसा दारुल उलूम रशीदिया के प्रबंधक मौलाना मोहम्मद आरिफ का कहना है कि धार्मिक शिक्षा के लिए मान्यता की जरूरत नहीं है। मॉडर्न स्कूली शिक्षा के लिए मान्यता आवश्यक है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि धार्मिक शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों को मान्यता से बाहर किया जाए। कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने जनवरी 2026 में स्पष्ट किया है कि केवल मान्यता न होने के आधार पर मदरसों को बंद नहीं किया जा सकता। ऐसे मदरसें सरकारी अनुदान और परीक्षा सुविधा के हकदार नहीं होंगे। बुधवार को ईदगाह रोड ज्वालापुर के मदरसा दारुल उलूम रशीदिया में उत्तराखंड के मदरसों को लेकर बैठक आयोजित हुई।

इसमें धार्मिक शिक्षा देने वाले मदरसों को शिक्षा बोर्ड से बाहर रखने की मांग की गई। इस दौरान मदरसा शिक्षा को लेकर भ्रम फैलाने, मदरसों को बदनाम करने और मदरसों के खिलाफ षड्यंत्र रचने पर चर्चा की गई। मौलाना आरिफ ने कहा कि मदरसों में बच्चें धार्मिक पढ़ाई कर हाफिज, कारी, मौलवी और मौलाना बनते है। धर्म की शिक्षाओं का प्रचार प्रसार करते हैं। कुछ लोग मदरसों के नाम पर घपला कर रहे हैं। मॉडर्न शिक्षा देते हुए फर्जी तरीके से मदरसों के नाम पर सरकार से मिड डे मील आदि सुविधाएं हासिल कर रहे है। ऐसे मॉडर्न शिक्षा संस्थानों की जांच होनी चाहिए। मदरसें सरकार से मिड डे मील कि सुविधा नहीं लेते है। देश की आजादी में भी मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों एवं युवाओं का विशेष योगदान और बलिदान शामिल है।

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