Meditation creates capabilities Dr Pandya - ध्यान लगाने से क्षमताओं का सृजन होता है : डॉ पण्डया DA Image

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ध्यान लगाने से क्षमताओं का सृजन होता है : डॉ पण्डया

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि ध्यान निरंतर करते रहना चाहिए। ध्यान में गोता लगाना चाहिए। ध्यान से अर्जन होता है, दुर्गुणों का विर्सजन होता है और फिर विवेक, सामर्थ्य क्षमताओं का सृजन होता है।वे गुरुवार को देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित नवरात्र साधना पर आयोजित गीतामृत की विशेष कक्षा को संबोधित कर रहे थे। कुलाधिपति ने कहा कि मां शैलपुत्री देवी सती थी, जिनकी वर्षों की तपस्या के कारण उनका हिमालय राज के घर मां पार्वती के रूप में जन्म हुआ। शैल का अर्थ है- पाषाण। ध्यान के द्वारा मन रूपी पाषाण को भेद कर चेतना का विकास किया जा सकता है। ध्यान मन की एकाग्रता, स्थिरता व आंतरिक क्षमता को बढ़ाता है। ध्यान से व्यक्तत्वि का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ध्यान हमेशा पवित्र स्थानों में किया जा चाहिए, जिससे उस स्थान की सकारात्मकता का प्रभाव साधक पर पड़े। सांसारिक ध्यान से साधक केवल मोह, माया के बंधन में ही रहता है। परन्तु परमात्मा का ध्यान मोक्ष प्राप्ति का साधन है। उन्होंने कहा कि नवरात्र में मातृशक्ति की उपासना के साथ ध्यान करने से साधक का चहुंमुखी विकास होता है। इसके साथ ही उन्होंने ध्यान में गोता लगाने के विविध पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। इससे पूर्व युगगायकों ने साधक का सविता को अर्पण.. गीत सितार, वाइलिन, बांसुरी आदि वाद्ययंत्रों से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर कुलपति शरद पारधी, प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव संदीप कुमार सहित समस्त विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर्स, विद्यार्थी आदि उपस्थित रहे।

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  • Web Title:Meditation creates capabilities Dr Pandya