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निगमानंद मामले में मातृसदन ने सीबीआई पर उठाए

निगमानंद मामले में मातृसदन ने सीबीआई पर उठाए

मातृसदन के अध्यक्ष शिवानंद सरस्वती ने निगमानंद मामले में तत्कालीन सीबीआई अधिकारियों पर दस करोड़ रुपये रिश्वत लेकर जांच को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। मातृसदन ने केंद्रीय सतर्कता आयोग के कमिश्नर को पत्र लिख जांच अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सानंद की मौत का मामला दर्ज न करने पर पुलिस के खिलाफ मातृसदन हाईकोर्ट में अपील करेगा।गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में मातृसदन के अध्यक्ष शिवानंद सरस्वती ने बताया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर भ्रष्टाचार के आरोप में सीबीआई के निदेशक के दायित्व छीने गए हैं। कहा कि निगमानंद की मौत मामले में सीबाईआई जांच में भी तत्कालीन स्पेशल मजिस्ट्रेट योगेंद्र सागर ने कई खामियां पाई थीं। इस पर स्पेशल मजिस्ट्रेट ने 19 सितंबर 2015 को सीबीआई को पुन: मामले की जांच कर 40 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सीबीआई कोर्ट में प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे। पर आदेश के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक जांच शुरू नहीं की गई है। शिवानंद ने कहा उन्होंने तब भी कहा था कि सीबीआई के अधिकारियों ने जांच को प्रभावित करने के लिए दस करोड़ रुपये लिए हैं। उनके पास इसके पुख्ता साक्ष्य भी हैं। शिवानंद ने कहा कि ऋषिकेश कोतवाली में दिवंगत ज्ञानस्वरूप सानंद के मामले में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। मातृसदन के एसएसपी देहरादून को पत्र लिखने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। अब मातृसदन पुलिस के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश की अवेहलना का मामला दर्ज कराएगा। शिवानंद ने कहा कि दिवंगत ज्ञानस्वरुप सानंद के पार्थिव शरीर को तीन दिनों के लिए मातृसदन को सौंपने के लिए हाईकार्ट में जल्द अपील की जाएगी। इसमें एम्स के डायरेक्टर को पार्टी बनाया जाएगा। कहा- गंगा से दूर किया जा रही लोगों कोशिवानंद सरस्वती ने कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत तेजी से काम हो रहा है। केद्रीय मंत्री ने 80 प्रतिशत काम पूरे होने का दावा किया है। जबकि असल में लोगों को गंगा से दूर किया जा रहा है। गंगा रक्षा के लिए तप करने वाले मनिषियों की हत्या की जा रही है। ऐसा ही हाल रहा तो गंगा का अमृत तुल्य जल आचमन तो दूर स्नान के लायक भी नहीं रहेगा। गंगा की अविरलता को बांध कर गंगा को प्रदूषण मुक्त नहीं किया जा सकता है।विसरा की डीएनए जांच की मांगशिवानंद ने कहा कि निगमानंद का विसरा मृत्यु के 25 दिन बाद जांच के लिए भेजा गया। इस दौरान विसरा को बदल दिया गया। विसरा के सभी पांच सैंपल जिनकी जांच हुई वे एक ही व्यक्ति के थे। जबकि मातृसदन विसरा की डीएनए जांच की मांग कर रहा है। निगमानंद की देखभाल कर रही नर्स को भी अस्पताल प्रशासन ने बचाया। यह सब अस्पताल की भूमिका पर संदेह करने के लिए काफी है।दूसरे दिन जारी रहा आत्मबोधानंद का अनशनहरिद्वार। मातृसदन आश्रम में ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का अनशन गुरुवार को जारी रहा। संशोधित गंगा एक्ट लागू करने समेत तीन सूत्रीय मांगों को लेकर आत्मबोधानंद ने बुधवार को अनशन शुरू किया था। वहीं आश्रम के स्वामी पुण्यानंद ने भी दूसरे दिन फलाहार ही लिया। आत्मबोधानंद ने कहा कि अगर सरकार गंगा को बांधने की जिद पर अड़ी है तो वे भी गंगा की अविरलता के लिए बलिदान देने से पीछे नहीं हटेंगे।

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