श्रमिकों की गिरफ्तारी के खिलाफ संगठनों का विरोध
हरिद्वार, संवाददाता। इंकलाबी मजदूर केंद्र सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों ने गुड़गांव और नोएडा में श्रमिकों और श्रमिक नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध किया है

इंकलाबी मजदूर केंद्र सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों ने गुड़गांव और नोएडा में श्रमिकों और श्रमिक नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध किया है। संगठनों ने सरकार पर श्रमिकों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दमनकारी नीतियों पर नाराजगी जताई है। गुरुवार को पत्रकार वार्ता में पंकज कुमार ने कहा कि फैक्ट्रियों में दिन-रात काम करने वाले मजदूरों का लगातार शोषण हो रहा है। मजदूर अपने वेतन और अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं, लेकिन शासन-प्रशासन उन्हें आंदोलन करने की अनुमति भी नहीं दे रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि 56 मजदूरों को फर्जी मुकदमों में गिरफ्तार किया गया है। यदि सभी श्रमिकों को जल्द रिहा नहीं किया गया तो दिल्ली के साथ-साथ हरिद्वार में भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण मजदूरों को बंधुआ बनाने की स्थिति पैदा हो रही है और सरकारी कंपनियों का तेजी से निजीकरण किया जा रहा है। चुनाव के समय वेतन बढ़ाने के वादे किए जाते हैं, लेकिन कंपनियां कम वेतन दे रही हैं, जिससे महंगाई के दौर में मजदूरों के लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने की मांग की। भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के महासचिव राज किशोर ने भी निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि इसी के चलते श्रमिकों को सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
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