हरिद्वार में 66 फीसदी कम बारिश से धान की रोपाई पर संकट
हरिद्वार जिले में मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश की कमी से धान और गन्ने की फसलें प्रभावित हो रही हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बारिश जल्द नहीं हुई, तो धान के उत्पादन में 20 फीसदी तक गिरावट आ सकती है।

हरिद्वार, संवाददाता। जिले में मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अब तक करीब 66 फीसदी कम बारिश दर्ज होने से खरीफ की मुख्य फसल धान की नर्सरी और रोपाई प्रभावित हो गई है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान के उत्पादन में करीब 20 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। वहीं, गन्ने की बढ़वार भी धीमी पड़ गई है। बारिश के अभाव में किसानों को बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। हरिद्वार जिले में धान और गन्ना खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें हैं। सामान्य तौर पर किसान मानसून की शुरुआती बारिश के साथ धान की रोपाई शुरू कर देते हैं, लेकिन इस बार खेतों में पर्याप्त नमी नहीं है। गन्ने की फसल को भी इस समय भरपूर पानी की आवश्यकता होती है। सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और डीजल पंपों पर निर्भरता बढ़ने से किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है。
उत्पादन पर असर पड़ना तय
धनपुरा निवासी किसान गालिब हसन का कहना है कि बारिश नहीं होने से किसानों को लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है, लेकिन उसके बावजूद फसल को प्राकृतिक नमी नहीं मिल पा रही। उन्होंने कहा कि सिंचाई केवल पानी की जरूरत पूरी करती है, जबकि बारिश फसल की जड़ों तक समान रूप से नमी पहुंचाती है। ऐसे में उत्पादन पर असर पड़ना तय है। कटारपुर के किसान पवन सैनी ने बताया कि बारिश के अभाव में गन्ने के साथ-साथ अन्य फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। धान की रोपाई में लगातार देरी हो रही है क्योंकि खेतों की नमी पूरी तरह खत्म हो चुकी है। पंजनहेड़ी के किसान राजकुमार ने बताया कि बारिश नहीं होने से फसलें पीली पड़ने लगी हैं। कटारपुर निवासी किसान नूतन कुमार ने बताया कि क्षेत्र में धान, गन्ना और गेहूं की सबसे अधिक खेती होती है। इस समय धान की बुवाई का मौसम है, लेकिन बारिश नहीं होने से किसान इंतजार करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि पछेती फसल में लागत अधिक आती है और उत्पादन भी कम मिलता है。
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