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सनातन धर्म का मूल स्वर संघर्ष नहीं बल्कि समन्वय है: पूर्व राष्ट्रपति

सनातन धर्म का मूल स्वर संघर्ष नहीं बल्कि समन्वय है: पूर्व राष्ट्रपति

संक्षेप:

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि सनातन धर्म का मूल स्वर संघर्ष नहीं, बल्कि समन्वय है। उन्होंने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी को श्रद्धांजलि देते हुए धर्म और समाज के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया और भारत माता मंदिर की स्थापना की भावना को साझा किया।

Feb 04, 2026 03:58 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, हरिद्वार
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पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि सनातन धर्म का मूल स्वर संघर्ष नहीं बल्कि समन्वय है। विविधता में एकता नारा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति का स्वभाव है। जहां समन्वय है वहां दीर्घकालिक निरंतरता है। हमें धर्म को समाज और अध्यात्म को राष्ट्र से जोड़ने का संकल्प लेना होगा। अध्यात्म को समन्वय से चलाएं। स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी ने हमें सिखाया है कि समाज में समन्वय बेहद आवश्यक है। उनका चिंतन वेदांत की गहराइयों से निकला था। वह एक ही संगम की धारा के तीन रूप थे। उनके द्वारा किए गए गए कार्य ने राष्ट्र को सभ्यता के रूप में प्रतिष्ठित किया।

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यह बात उन्होंने श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह के पहले दिन मंच से कही। ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कहा कि उन्हें पूज्य गुरुदेव की समाधि और उनके द्वारा स्थापित भारत माता मंदिर में दीप जलाने और आरती करने का सौभाग्य मिला है। स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज अनेक मतों, पंथों और संस्थाओं के बीच संवाद और समरसता के प्रबल सेतु हैं। भारत माता मंदिर का निर्माण सर्वधर्म स्वभाव की इसी भावना से हुआ था। संन्यासी होने के साथ स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी राष्ट्रचेतना के साधक थे। यह आयोजन तभी सार्थक होगा जब हमारा संकल्प जागे। जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि वह खुद को समन्वय सेवा ट्रस्ट का सदस्य मानते हैं। यहां वास्तव में सबका समन्वय दिखता है। समन्वय ही समस्त राष्ट्र का आधार है। संत की समाधियों पर मेले और पुष्प चढ़ते हैं। राजा-महाराजाओं की समाधि पर बुलडोजर भी चल सकता है। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंद सनातन धर्म के अग्रणी संत थे। उन्होंने विदेशों में भी धर्म का प्रचार किया। सम्पूर्ण विश्व में सनातन धर्म ही सबसे पुरातन धर्म है। ऐसे धर्म को आगे बढ़ाने वाले संत को वह प्रणाम करते हैं। इससे पूर्व पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उत्तरी हरिद्वार में भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी के तीन दिवसीय श्रीविग्रह मूर्ति स्थापना समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज, जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष एवं भारत माता मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरी देव, महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद गिरी और महामंडलेश्वर ललितानंद गिरी समेत कई लोगों ने शिरकत की। उत्तरी हरिद्वार में राष्ट्रगान और दीप प्रज्ज्वलित कर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और अन्य अतिथियों ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।