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कोटद्वार

उपेक्षा करने पर भड़की आशा कार्यकत्री

हिन्दुस्तान टीम,कोटद्वार
Fri, 25 Aug 2017 02:42 PM
उपेक्षा करने पर भड़की आशा कार्यकत्री

स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आशा कार्यकत्रियों ने विभाग पर उनका शोषण करने का आरोप लगाते हुए तहसील में प्रदर्शन किया और तहसीलदार छवाण सिंह रावत के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया।शुक्रवार को दुगड्डा ब्लॉक की समस्त आशा कार्यकत्रियां जुलूस की शक्ल में तहसील पहुंची। मौके पर उन्होंने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे वर्ष 2007 से स्वास्थ्य विभाग में कार्य कर रही हैं लेकिन किसी भी सरकार ने उनके हितों पर ध्यान नहीं दिया। आक्रोशित कार्यकत्रियों ने कहा कि उन्हें उनके कार्य का मानदेय भी समय पर नहीं मिलता है। वर्ष 2012 में तत्कालीन राज्य सरकार ने आशा कार्यकत्रियों को पांच हजार रुपये सालाना मानदेय देने की घोषणा की थी जिसकी 2014 में केवल एक ही किश्त मिली, उसके बाद वह राशि भी नहीं मिली। वर्ष 2016 में भी राज्य सरकार की ओर से 2000 रुपये मानदेय देने की घोषणा की गई लेकिन वह घोषणा भी ठंडे बस्ते में चली गई। कहा कि उन्हें केवल जच्चा-बच्चा की देखभाल के लिए विभाग में रखा गया था, लेकिन उनसे अब अन्य कार्य भी कराये जा रहे हैं और बदले में मानदेय भी नहीं दिया जा रहा है। आशा कार्यकत्रियों ने प्रदेश सरकार से अविलंब उनके हितों की रक्षा करने की मांग की और ऐसा न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।ज्ञापन प्रेषित करने वालों में संगठन अध्यक्ष प्रभा चौधरी, उपाध्यक्ष मीरा नेगी, सुमन राठौर, गीता जदली,लक्ष्मी नेगी, प्रमिला देवी और बसंती रावत सहित सभी आशा कार्यकत्रियां शामिल थी।

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