हाईवे पर विज्ञापन चिपकाएं, नौ के खिलाफ एफआईआर दर्ज
नेशनल हाईवे पर बिना अनुमति के विज्ञापन करने वालों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। एनएचएआई ने नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। अवैध विज्ञापनों के खिलाफ सख्ती के बाद कई विज्ञापन हटाए जाने लगे हैं। एनएचएआई ने चेतावनी दी है कि दोष सिद्ध होने पर एक साल की कैद और जुर्माना भी हो सकता है।

नेशनल हाईवे की दीवार-पिलर और फ्लाईओवर पर बिना अनुमति पोस्टर-बैनर और अवैध तरीके से लिखकर विज्ञापन प्रदर्शित करने वालों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। इस मामले में एनएचएआई ने कनखल थाने में नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। डीएम मयूर दीक्षित के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग संरचना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर यह कदम उठाया गया। पीआईयू हरिद्वार के महाप्रबंधक एवं सह परियोजना निदेशक विशाल कुमार गोयल ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-334 पर निर्माण पूरा होने के बाद अवैध तरीके से विज्ञापन और प्रचार किया जा रहा है, जो दंडनीय अपराध है। बार-बार चेताने के बावजूद डॉ. करन, सांची क्लीनिक, सदाशिव इंफ्रा, डॉ. भारत, भगंदर क्लीनिक, डॉ. सिंघला, गुरु कृपा, एएफआई पशु आहार और जेके मैक्स ने अपना प्रचार बंद नहीं किया।
इस पर नौ फर्म स्वामियों के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई है। एनएचएआई के अनुसार, बाकी लोगों को भी चिह्नित किया जा रहा है। एफआईआर के बाद हटने लगे अवैध प्रचार नेशनल हाईवे पर अवैध विज्ञापनों के खिलाफ सख्ती के बाद विज्ञापनदाताओं में हलचल मच गई। एनएचएआई के अनुसार, एफआईआर के तुरंत बाद डॉ. करन ने अपने विज्ञापन हटाने शुरू कर दिए हैं। बाकी लोगों को भी अपने-अपने विज्ञापन हटाने के निर्देश दिए गए हैं। दोष सिद्ध होने पर एक साल कैद का प्रावधान एनएचएआई के अनुसार, अवैध लिखावट से न केवल शहर की स्वच्छता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, बल्कि वाहन चालकों का ध्यान भटकता है। एनएचएआई ने स्पष्ट किया कि यदि दोष सिद्ध होता है तो एक वर्ष तक की सजा और दस हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

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