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गुरुकुल महाविद्यालय में कुलाधिपति, कुलपति और कुलसचिव पद समाप्त

गुरुकुल महाविद्यालय में कुलाधिपति, कुलपति और कुलसचिव पद समाप्त

1 / 2गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर की अंतरंग सभा की बैठक में कुलाधिपति, कुलपति और कुलसचिव के पद समाप्त करने का प्रस्ताव रखा...

गुरुकुल महाविद्यालय में कुलाधिपति, कुलपति और कुलसचिव पद समाप्त

2 / 2गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर की अंतरंग सभा की बैठक में कुलाधिपति, कुलपति और कुलसचिव के पद समाप्त करने का प्रस्ताव रखा...

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गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर की अंतरंग सभा की बैठक में कुलाधिपति, कुलपति और कुलसचिव के पद समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया। वहीं महाविद्यालय को कृषि विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की बात कही गई।ज्वालापुर स्थित गुरुकुल महाविद्यालय परिसर में रविवार को अंतरंग सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक में महाविद्यालय की शिक्षा व्यवस्था सुचारु करने के लिए एक समिति का गठन किया गया। समिति में सदस्य प्रो. महावीर अग्रवाल, प्रो. वेदप्रकाश शास्त्री और डॉ. एसके जायसवाल को शामिल किया गया। संस्था को कृषि विश्वविद्यालय के रुप में विकसित करने का प्रस्ताव पास किया गया।

संस्था में कुलाधिपति, कुलपति और कुलसचिव पदों की आवश्यकता नहीं होने की बात कही गई जिसके चलते इन तीनों पदों को समाप्त करने का प्रस्ताव पास किया गया। अनुशासनहीनता के चलते दो सप्ताह पहले निलंबित किए गए संस्था के कुलसचिव डॉ. अजय कौशिक को अंतरंग सभा के दौरान निलंबन की पुष्टि की गई। संस्था की आय के स्रोत बढ़ाने के लिए आधुनिक पाठ्यक्रमों के संचालन की सहमति भी अंतरंग सभा में दी गई। बैठक में अंतरंग सभा के प्रधान योगेंद्र सिंह चौहान, मुख्याधिष्ठाता क्षेत्रपाल सिंह चौहान, प्रो. महावीर अग्रवाल, प्रो. वेद प्रकाश शास्त्री, डॉ. पूरण सिंह चौहान, अनिल गोयल सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। कई बार सुर्खियों में रहे पददेशभर में किसी महाविद्यालय में कुलाधिपति, कुलपति और कुलसचिव के पद नहीं है। इन पदों के प्रशासनिक अधिकारी केवल विश्वविद्यालयों में होते हैं। खुद महाविद्यालय के पास उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की मान्यता है। महाविद्यालय से इन पदाधिकारियों के नाम से विश्वविद्यालय के साथ पत्राचार किया जाता है जिसके चलते भ्रम की स्थिति होती है और लोग भी कंफ्यूज होते हैं। केंद्र से मिल रही शतप्रतिशत ग्रांटगुरुकुल महाविद्यालय को केंद्र से शतप्रतिशत ग्रांट मिल रही है। सभी प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर स्टॉफ को केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मिलने वाले बजट से वेतन और भत्ते दिए जाते हैं। महाविद्यालय के पास सैकड़ों बीघा से ज्यादा जमीन और अन्य जायदाद है। लेकिन आजतक संस्था का विकास नहीं हो सका। इसको लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं बनी हुई हैं।

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