उज्जैन, प्रयाग और नासिक की तर्ज पर हरिद्वार कुंभ; पेशवाई के साथ अमृत स्नान भी होगा

Feb 26, 2026 01:13 pm ISTGaurav Kala हरिद्वार
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हरिद्वार कुंभ को लेकर मेला प्रशासन की ओर की गई बैठक में कहा गया कि यह दिव्य आयोजन उज्जैन, प्रयाग और नासिक की तर्ज पर आयोजित होगा, जिसमें धर्मध्वजा, पेशवाई और अमृत स्नान होंगे। बैठक में 13 अखाड़ों की जगह सिर्फ 5 अखाड़े ही पहुंचे।

उज्जैन, प्रयाग और नासिक की तर्ज पर हरिद्वार कुंभ; पेशवाई के साथ अमृत स्नान भी होगा

Haridwar Kumbh 2027: हरिद्वार कुंभ में प्रयागराज, उज्जैन और नासिक की तर्ज पर धर्मध्वजा, पेशवाई और अमृत स्नान होंगे। वर्ष 2027 में प्रस्तावित कुंभ की तैयारियों को लेकर मेला नियंत्रण भवन में मेला प्रशासन की ओर से बैठक में मेला प्रशासन ने यह जानकारी दी गई है। बैठक में हालांकि सभी 13 अखाड़ों के साधु संतों को आमंत्रित किया गया था। केवल पांच अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने ही बैठक में सहभागिता की।

बैठक में मेला प्रशासन के अधिकारियों ने साधु-संतों के साथ आगामी अर्द्धकुंभ मेले को सकुशल संपन्न कराने को लेकर चर्चा की। अधिकारियों ने पीपीटी के माध्यम से कुंभ के दौरान छावनियों, धर्मध्वजा, पेशवाई और भूमि आवंटन से जुड़ी जानकारियां साझा की। इसके अलावा निर्माण कार्यों, आधारभूत सुविधाओं, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, बिजली पानी की व्यवस्था, स्वच्छता और सुरक्षा इंतजामों की योजनाओं से भी अवगत कराया।

मेले की भव्यता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि

अधिकारियों ने बताया कि मेले को दिव्य और भव्य बनाने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। बैठक में मौजूद संतों से सुझाव भी मांगे गए। सभी संतों ने भी अपने सुझाव रखे और समयबद्ध तरीके से निर्माण कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया। उन्होंने अखाड़ों की पारंपरिक व्यवस्थाओं, शाही स्नान की तैयारियों और साधु संतों की सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। मेला प्रशासन ने आश्वस्त किया कि संत समाज के सुझावों को योजना में शामिल कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी, ताकि मेला सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक आयोजित हो सके।

कुंभ की तैयारियों पर अखाड़ों का क्या कहना

अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं जूना अखाड़े के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरी महाराज ने बताया कि कुंभ मेले को लेकर मेलाधिकारी की अध्यक्षता में अच्छे वातावरण में बैठक हुई है। मेले को दिव्य और भव्य बनाने को लेकर चर्चा की गई है। उन्होंने बताया कि पूर्व की भांति हरिद्वार में भी सुरक्षित कुंभ मेले का आयोजन होगा। होलाष्टक लगने के कारण सभी अखाड़ों के साधु संत बैठक में नहीं आ पाए। नवरात्र के पश्चात फिर से बैठक होगी, जिसमें सभी अखाड़ों के साधु संतों की उपस्थिति नजर आएगी। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हरिद्वार में भव्य कुंभ का आयोजन होगा। कुंभ मेले में साधु संतों की मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने को लेकर अधिकारियों से चर्चा हुई है।

प्रशासन बोला- दिव्य कुंभ के विजन पर फोकस

सभी साधु संत मुख्यमंत्री के दिव्य भव्य कुंभ के विजन को साकार करेंगे। हरिद्वार कुंभ में प्रयागराज, उज्जैन और नासिक की तर्ज पर धर्मध्वजा, पेशवाई और अमृत स्नान होंगे। उन्होंने बताया कि सभी साधु संत कुंभ मेले के आयोजन को लेकर एक हैं। जितने भी संत बैठक में शामिल नहीं हुए, वो अगली बैठक में शामिल होंगे। मेलाधिकारी सोनिका ने बताया कि कुंभ मेले में अमृत स्नान, पेशवाई और भूमि आवंटन को लेकर साधु संतों से चर्चा हुई है।

कुंभ के लिए सभी अखाड़े एकजुट

निरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमंत रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि हरिद्वार में 2027 अर्द्धकुंभ मेले को लेकर सभी अखाड़ों के साधु-संत एकजुट हैं। दिव्य, भव्य और सुरक्षित कुंभ का आयोजन किया जाएगा। होलाष्टक के चलते सभी अखाड़ों के साधु संत बैठक में उपस्थित नहीं हो पाए। जल्द ही अगली बैठक में सभी अखाड़ों के साधु संत शामिल होंगे।

प्रशासन की बैठक से आठ अखाड़े रहे गैरहाजिर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में 2027 कुंभ आयोजित करने की तैयारी चल रही है। केंद्र से 500 करोड़ का बजट जारी हो गया है। मेला प्रशासन की बुधवार को बुलाई गई बैठक में सभी 13 अखाड़ों के दो-दो प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था। मेला नियंत्रण भवन में बैठने की व्यवस्था भी उसी के अनुसार की गई थी। बैठक में केवल एक गुट के पांच अखाड़ों के साधु-संत ही शामिल हुए। अन्य आठ अखाड़ों के साधु-संत बैठक में नहीं पहुंचे। बैठक शुरू होने के आधे घंटे बाद साधु-संतों की खाली कुर्सी के आगे रखी अखाड़ों की नेम प्लेट हटा दी गई।

उन कुर्सियों पर अधिकारियों को बैठा दिया गया। हालांकि बैठक में शामिल साधु संतों ने किसी भी प्रकार की गुटबाजी से इनकार किया। सभी साधु-संतों ने कहा कि इस समय होलाष्टक लग गया है। इस कारण अन्य अखाड़ों के साधु-संत बैठक में उपस्थित नहीं हो पाए हैं। बैठक में निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज, जूना अखाड़े के अंतराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरि गिरी महाराज, अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता नारायण गिरी महाराज, महेश पुरी, कंचन गिरी और महेश पुरी, आह्वान अखाड़े के महामंत्री श्रीमहंत सत्यगिरि महाराज आदि रहे।

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