पाकिस्तान से ईमान का सौदा करने वाली सोनम की कहानी; लैपटॉप और 15 बैंक खातों में पूरा खेल

लाइव हिन्दुस्तान, हरिद्वार
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पाकिस्तान में अपना ईमान बेचने वाली सोनम ने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मालूम हुआ है कि उसके पास मुस्लिम खाताधारकों के नाम से 15 बैंक खाते थे, उन्हीं से रकम आगे ट्रांसफर होती थी।

पाकिस्तान से ईमान का सौदा करने वाली सोनम की कहानी; लैपटॉप और 15 बैंक खातों में पूरा खेल

हरिद्वार के रुड़की में कोटा माछरहेड़ी के आसफनगर गांव से गिरफ्तार सोनम के मामले में धीरे-धीरे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर सोनम द्वारा किए गए करोड़ों के संदिग्ध ऑनलाइन लेनदेन में सोनम ने भी मोटी कमाई की। उसके खुद के बैंक खातों से कोई रकम ट्रांसफर नहीं हुई। मुस्लिम खाताधारकों के नाम से 15 बैंक अकाउंट थे, जिनसे रकम आगे भेजी जाती थी

पाकिस्तान के जरिए अवैध लेनदेन मामले में जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई कलियर क्षेत्र की युवती सोनम से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस को दी जानकारी में सोनम ने बताया कि गांव की ही एक युवती ने उसे उमर का नंबर दिया था।

आर्थिक तंगी से जूझ रही सोनम ने काम की तलाश में उमर से संपर्क किया था। इसके बाद वह धीरे-धीरे ट्रांजेक्शन के इस नेटवर्क से जुड़ती चली गई। कलियर इंस्पेक्टर कमल मोहन भंडारी ने बताया कि पूछताछ में सोनम ने बताया कि उसकी और उमर की घंटों तक व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत होती थी। शुरुआत में करीब एक महीने तक केवल उमर से ही बात होती रही।

जम्मू-कश्मीर के उमर ने दिलाया काम

बाद में उमर ने उसकी बातचीत आदिल और हजीब नाम के लोगों से कराई। सोनम ने पुलिस को बताया कि वह आज तक इन लोगों से कभी आमने-सामने नहीं मिली और केवल व्हाट्सएप कॉल के जरिए ही संपर्क में रही। सोनम ने पुलिस को बताया कि वह एक खाते से रुपये निकालकर दूसरे खातों में जमा करती थी। इसके लिए वह एटीएम में जाकर नकदी निकालती और फिर अलग-अलग बैंक खातों में जमा करा देती थी। जांच में सामने आया है कि वह एक बार में करीब 30 हजार रुपये जमा करती थी।

पुलिस को शक- अलग-अलग खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर

पुलिस को शक है कि इसी तरीके से अलग-अलग खातों के माध्यम से बड़ी रकम का लेनदेन किया गया। सूत्रों के अनुसार सोनम और उमर दोनों मुस्लिम समुदाय से हैं। इसी कारण उमर ने उसकी पहचान आदिल और हजीब से कराई थी। पुलिस अब इन दोनों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क केवल बैंक खातों के इस्तेमाल तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा था।

एक साल से कमीशन पर काम कर रही थी सोनम

एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया कि जम्मू में गिरफ्तार राहुल खान के मोबाइल फोन में सोनम का नंबर मिला था। मोबाइल की पड़ताल के दौरान खातों से जुड़े कुछ दस्तावेज भी बरामद हुए, जिन्हें राहुल खान ने सोनम को भेजे थे। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हरिद्वार पहुंचकर स्थानीय पुलिस की मदद से आसफनगर गांव में दबिश दी और युवती को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि सोनम की राहुल खान से पहचान व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से हुई थी। बताया गया कि आर्थिक तंगी और गरीब होने के कारण उसने एक दोस्त से काम दिलाने की बात कही थी। इसके बाद वह कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़ गई।

पुलिस लगा रही पता नेटवर्क में कौन-कौन हैं

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और रकम कहां से आ रही थी और कहां भेजी जा रही थी। मालूम हो कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के कठुआ से जुड़े पाकिस्तान के माध्यम से करोड़ों रुपये के अवैध ट्रांजेक्शन का मामला सामने आया था। मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई राज्यों में नेटवर्क फैला होने के संकेत मिले थे। इसी कड़ी में हरिद्वार में यह कार्रवाई की गई है।

खाता बंद होते ही नया खाता नंबर आ जाता था

सोनम के पास करीब 15 बैंक खाते थे, जिनमें रुपये आते थे। जैसे ही कोई खाता बंद होता सोनम को नए खाते का एटीएम और पासबुक पहुंच जाती थी। करीब पांच अकाउंट अभी तक बंद हो चुके थे, जिसमें कुछ रुपये भी थे। कितने रुपये थे, इस बात की जानकारी हरिद्वार पुलिस को नहीं थी।

सोनम ने कभी अपने खाते का नहीं किया इस्तेमाल

सोनम ने कभी भी अपने खाते का इस्तेमाल नहीं किया था। उसको बताया गया था कि अपने खाते से रुपये नहीं भेजने हैं। इस कारण उसने कभी खाते से रुपये न लिए और न ही दिए। जिन खातों में रुपये भेजे गए है, वह खाते अधिकांश मुस्लिम समुदाय से जुड़े है।

खाते में रुपये आते ही आ जाता था मैसेज

बैंक खातों में रुपये आते ही सोनम को व्हाट्सएप पर मैसेज आ जाता था। कुछ देर तक वह न देखे तो उसे कॉल आ जाती थी। इसके बाद वह तत्काल बैंक के लिए निकल जाती थी और रुपये निकालकर दूसरे बैंक खातों में जमा कर देती थी, अधिकांश समय दोपहर में उसको दिए बैंक अकाउंट में रुपये आते थे।

रिपोर्ट- सागर जोशी

Gaurav Kala

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