'वेज बिरयानी' नहीं 'वेज पुलाव' बोलिए; हरिद्वार में संतों की मुहिम, क्या आरोप?
हरिद्वार में संतों ने 'वेज बिरयानी' नाम पर प्रतिबंध लगाने का अभियान शुरू किया है। उनका कहना है कि इसकी जगह 'वेज पुलाव' जैसे नाम इस्तेमाल किया जाना चाहिए। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…

हरिद्वार में अखंड परशुराम अखाड़े के संतों ने 'वेज बिरयानी' नाम पर प्रतिबंध लगाने की मुहिम शुरू की है। संतो का कहना है कि बिरयानी शब्द से मांसाहारी फूड का अहसास होता है। इससे लोगों और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। संतों ने कहा कि वह चाहते हैं कि दुकानदार 'वेज बिरयानी' का नाम बदलकर इसे 'वेज पुलाव' रखें। संतों ने नगर आयुक्त और जिला अधिकारी को पत्र लिखकर होटलों के मेन्यू से 'कबाब' और 'चाप' जैसे नाम हटाने की मांग की है।
'वेज बिरयानी' नहीं 'वेज पुलाव' बोलिए
'अखंड परशुराम अखाड़ा' की अगुवाई में संतों का यह समूह मांग कर रहा है कि दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले 'वेज बिरयानी' शब्द को हटाकर उसकी जगह 'वेज पुलाव' शब्द का इस्तेमाल करें। अखाड़े के सदस्य पूरे शहर में पोस्टर और रेहड़ियों पर 'वेज बिरयानी' शब्द के ऊपर 'वेज पुलाव' के स्टिकर चिपका रहे हैं।
बिरयानी कराता है नॉनवेज का आभास
संतों का कहना है कि 'वेज बिरयानी' खासकर बिरयानी शब्द से मांसाहारी होने का आभास कराता है। इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं।
शाकाहारी लोगों की भावनाएं होती हैं आहत
अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि स्थानीय नगर निकाय के नियमों के तहत हरिद्वार के कुछ क्षेत्रों में मांस, शराब और अंडे की बिक्री व सेवन पर प्रतिबंध है। बिरयानी मूल रूप से एक मांसाहारी व्यंजन है। भले ही स्थानीय दुकानदार मांस का उपयोग नहीं करते हैं, फिर भी यह शब्द शाकाहारी लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।
'कबाब' और 'चाप' भी मांसाहारी भोजन से जुड़े
अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि 'कबाब' और 'चाप' जैसे व्यंजन भी मांसाहारी व्यंजनों से जुड़े हैं। उनके अभियान का अगला चरण इन नामों को निशाना बनाएगा। संगठन ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर होटलों और रेस्तरां से इन शब्दों यानी 'कबाब' और 'चाप' को अपने मेन्यू से हटाने का अनुरोध किया है।
प्रतिबंधित क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन की डिलीवरी पर लगे रोक
पंडित अधीर कौशिक ने यह भी दावा किया कि घर-घर खाना पहुंचाने वाले ऑनलाइन ऐप प्रतिबंधित क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन की आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने जिला अधिकारी से ऐसी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने की गुजारिश की है। यद्यपि पूरे शहर में मांस पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन स्वतंत्रता-पूर्व के नियमों के तहत कनखल और हर की पौड़ी सहित मुख्य क्षेत्रों में इसकी बिक्री प्रतिबंधित है।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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