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29 मार्च, 2020|6:22|IST

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साहित्यकार हिमांशु जोशी का नैनीताल से रहा गहरा नाता

साहित्यकार हिमांशु जोशी का नैनीताल से गहरा नाता रहा। ‘कगार की आग’ के बाद उनका बहुचर्चित उपन्यास ‘तुम्हारे लिए’ पूरा नैनीताल को अपने में समाए हुए है। 
कहा जाता है कि कई पाठक उपन्यास पढ़ने के बाद नैनीताल के वर्णित स्थलों को देखने यहां पहुंचे। नैनीताल को लेकर हिमांशु ने अपने संस्मरण में लिखा है कि नैनीताल एक पराया अजनबी शहर कब मेरे लिए अपना, मेरे सपनों का शहर बन गया, याद नहीं। वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ बताते हैं कि ‘तुम्हारे लिए’ उपन्यास में जहां किशोर वय के सुकोमल प्रेम को प्रमुखता दी गई है वहीं जीवन के कटु यथार्थ को भी खूबसूरती से पिरोया गया है। चाइना पीक, टिफिन टॉप आदि स्थलों की खूबसूरती को इसमें स्थान दिया गया है। 

पहाड़ की विरासत थे
हिमांशु जोशी पहाड़ की विरासत थे, रिक्त हुए इस स्थान की पूर्ति होना फिलहाल संभव नहीं लगता है। जाने-माने उद्घोषक हेमंत बिष्ट का कहना है कि हिमांशु जी बड़े साहित्यकार के साथ ही नेक दिल इंसान थे। अपने एक संस्मरण में स्वयं जोशी लिखते हैं कि आज भी कभी नैनीताल जाता हूं तो उन भीड़ भरी सड़कों पर मेरी आंखें कुछ खोजने सी क्यों लगती हैं। रात के अकेले में वीरान सड़कों पर भटकना अच्छा क्यों लगता है।

पहाड़ के रचनाकारों को हिमांशु ने बढ़ाया
प्रो. बटरोही बताते हैं कि हिमांशु ने शैलेश मटियानी, शेखर जोशी तथा लक्ष्मी दत्त बिष्ट की तर्ज पर पहाड़ के जनजीवन के अंतर्विरोधों को अपनी रचनाओं में प्रमुख स्थान दिया। ‘युगमंच’ के अध्यक्ष वरिष्ठ संस्कृति कर्मी जहूर आलम का कहना है कि पहाड़ की नारी की आत्मवेदना को हिमांशु जी ने समाज के बीच रखा।  

उपन्यासों पर धारावाहिक 
उनकी चर्चित कृति तुम्हारे लिए पर दूरदर्शन धारावाहिक और सुराज उपन्यास पर फिल्म बनी। जबकि तर्पण और सूरज की ओर कहानियों पर टेलीफिल्में बनीं। उनकी कृतियों का दुनिया की अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ। उन्होंने अनेक देशों की साहित्यिक यात्राएं भी कीं। विभिन्न संगठनों एवं संस्थानों ने उन्हें अपना अपना सदस्य बनाया। भारत सरकार ने उन्हें हिंदी-सलाहकार समितियों में शामिल किया।  

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  • Web Title:Writer Himanshu Joshi have deep relationship with Nainital