Haldwani News: एसटीएच में 3 साल से धूल फांक रहा एनआईसीयू
Haldwani News: हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में कोरोना काल के दौरान लाखों रुपये खर्च कर 'कम्प्रेहैंसिव पीडियाट्रिक केयर यूनिट' बनाई गई, जिसमें 12 बेड का एनआईसीयू भी है जो आज तक चालू नहीं हो पाया। गंभीर नवजातों को इलाज के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
Haldwani News: हल्द्वानी। डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में कोरोना काल के दौरान कराड़ों रुपये खर्च कर ‘कम्प्रेहैंसिव पीडियाट्रिक केयर यूनिट’ (सीपीसीयू) बनायी गई। इस यूनिट के भीतर करीब 12 बेड का एनआईसीयू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) भी बनाया गया। यह यूनिट बनने के बाद से आज तक शुरू नहीं हो पाई है। कुमाऊं के सभी छह जिलों से रेफर होकर आने वाले गंभीर नवजात और बच्चे इलाज के लिए एसटीएच पर निर्भर हैं। वर्तमान में एसटीएच में संचालित बीमार नवजातों के लिए विशेष इकाई (एसएनसीयू) है। 24 बेड के यह एसएनसीयू साल भर पैक रहता है। किसी तरह से बाल रोग विभाग के डॉक्टर गंभीर नवजातों का इलाज करते हैं। कई बार एसएनसीयू में जगह नहीं मिल पाती, जिसके चलते मजबूरन गंभीर रूप से बीमार बच्चों व नवजातों को रेफर करना पड़ता है। 12 बेड का एनआईसीयू अगर चालू होता तो बाल मरीजों को काफी राहत मिलती。
एक दिन का 7 हजार से ज्यादा का है खर्चा
एसटीएच में जिस नवजात बच्चे को एसएनसीयू में जगह नहीं मिल पाती है तो वह मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल में एसएनसीयू में नवजात को रखते हैं। जहां पर एक दिन का किराया 7 हजार रुपये से ज्यादा का है।
एसएनसीयू के भीतर लाखों रुपये की रखी है मशीनें
एसटीएच के तीसरे फ्लोर पर बने सीपीसीयू यूनिट के भीतर बने इस एनआईसीयू में लाखों रुपये की आधुनिक मशीन रखी है। इनमें इंक्यूबेटर, रेडियंट वार्मर, वेंटिलेटर, कार्डियो-रिस्पिरेटरी मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, ब्लड प्रेशर मॉनिटर, फोटोथेरेपी लाइट्स, इन्फ्यूजन पंप आदि मशीनें शामिल हैं। यह मशीनें गंभीर बच्चों को तुरंत इलाज के लिए जरूरी है। एसटीएच में डॉक्टर व स्टाफ की कमी है के चलते 3 साल बाद भी यह एसएनसीयू चालू नहीं हो पाया है।
एसएनसीयू को चालू करने के पूर्व में प्रयास किए गए थे
लेकिन स्टाफ की दिक्कत के चलते उसे चालू नहीं किया जा सका। बाल रोग विभाग के डॉक्टरों के साथ बैठक कर उसको चालू करने के प्रयास किए जाएंगे। - डॉ. अरुण जोशी, एमएस, एसटीएच
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