रंगमंच के जरिए वरिष्ठ नागरिकों की दबी हुई प्रतिभा को मिली नई उड़ान
हल्द्वानी में ग्रोइंग विजडम एकेडमी में 60 वर्ष से अधिक उम्र के प्रतिभागियों के लिए एक रंगमंच कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रसिद्ध कलाकार सुभाष रावत ने इसे संचालित किया, जिसमें बुजुर्गों ने थिएटर गतिविधियों के माध्यम से अपनी कलात्मकता को उजागर किया। 89 वर्षीय पार्वती पांडे इस कार्यशाला की मुख्य आकर्षण रहीं।

हल्द्वानी, संवाददात। क्रिएटिव उत्तराखंड-म्योर पहाड़ और ड्रामा डेरा की ओर से मंगलवार को ग्रोइंग विजडम एकेडमी में एक अनूठी रंगमंच कार्यशाला का आयोजन किया गया। क्रिएटिव ड्रामा डे-आज हमारा भी है शीर्षक से आयोजित इस कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें शामिल होने वाले सभी प्रतिभागी 60 वर्ष से अधिक उम्र के थे। प्रसिद्ध रंगमंच कलाकार सुभाष रावत ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए इस कार्यशाला का संचालन किया। उन्होंने विभिन्न थिएटर गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों के भीतर दबी हुई कलात्मकता और ऊर्जा को बाहर निकालने का प्रयास किया। कार्यशाला के दौरान बुजुर्गों का उत्साह किसी युवा से कम नहीं था।
आयोजक क्रिएटिव उत्तराखंड के नरेंद्र बंगारी ने बताया कि यह आयोजन एक व्यापक अभियान की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के इन 'युवाओं' की रचनात्मकता को निखारने में इस तरह की कार्यशालाएं मील का पत्थर साबित होंगी। इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी उमेश तिवारी 'विश्वास', प्रो. प्रभात उप्रेती और हेलो हल्द्वानी की सुनीता भट्ट ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यशाला में मुख्य आकर्षण 89 वर्षीय युवा पार्वती पांडे रहीं, जिन्होंने अपनी जीवंतता से सबको प्रेरित किया। इनके साथ ही बालकृष्ण जोशी, मनोज जोशी, हरीश बिष्ट और रीता उप्रेती समेत कुल 20 प्रतिभागियों ने थिएटर की बारीकियों को सीखा।

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