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विश्व की प्राचीनतम भाषाओं की जननी है संस्कृत

संस्कृत भारती की ओर से बरेली रोड स्थित लक्ष्मी शिशु मंदिर में गुरुवार से त्रिविध आवासीय संस्कृत प्रशिक्षण शुरू हो गया। पूर्व सांसद बलराज पासी, यूओयू के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव और मेयर डॉ. जोगेंद्र रौतेला ने सामूहिक रूप से शिविर का उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि बलराज पासी ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। संस्कृत भारती इसके प्रचार प्रसार की दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है। उन्होंने कहा भारत का अस्तित्व संस्कृत से है, हमें संस्कृत बोलने का अभ्यास करना चाहिए। उत्तराखंड मुक्त विवि के कुलपति प्रो. राव ने कहा कि संस्कृत प्रेम के कारण मैंने बचपन में ही संपूर्ण अमरकोश याद कर लिया था। संस्कृत की महत्ता पर उन्होंने कहा अगली पीढ़ी के कंप्यूटर संस्कृत में आएंगे। आरोग्य भारती के अधिकारी डॉ. अशोक वार्ष्णेय ने प्राचीन चिकित्सा पद्धति, आयुर्वेद के बारे में जानकारी दी। मेयर डॉ. रौतेला ने उत्तराखंड के सभी जिलों से आए शिविरार्थियों का स्वागत किया। इस दौरान गिरीश तिवारी, डॉ. बुद्धदेव शर्मा, जानकी त्रिपाठी, जयप्रकाश, राकेश शर्मा, संजू ध्यानी, डॉ. गोपाल दत्त त्रिपाठी, डॉ. कमल किशोर वार्ष्णेय, डॉ. मधुर शर्मा, कैलाश चंद्र, कैलाश सनवाल, संतोष पोखरिया आदि मौजूद रहे।

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  • Web Title:Sanskrit is the mother of the world's oldest languages