फायर सीजन के बीच 100 वन कर्मी जनगणना ड्यूटी में लगाए
मोहन भट्ट, हल्द्वानी। उत्तराखंड के जंगलों में बढ़ते तापमान के साथ वनाग्नि (फॉरेस्ट

मोहन भट्ट, हल्द्वानी। उत्तराखंड के जंगलों में बढ़ते तापमान के साथ वनाग्नि (फॉरेस्ट फायर) का खतरा गहराने लगा है। फायर सीजन की चुनौतियों के बावजूद, कुमाऊं मंडल के करीब 100 वन कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाने के आदेश जारी किए गए हैं।जानकारी के मुताबिक, अकेले तराई पश्चिमी वन प्रभाग से सबसे ज्यादा 32 कर्मचारियों को इस कार्य में लगाया गया है, जबकि अन्य प्रभागों से भी फील्ड स्टाफ की तैनाती की गई है। उल्लेखनीय है कि 15 फरवरी से 15 जून तक चलने वाले फायर सीजन के मद्देनजर विभाग पहले ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त कर चुका है, ताकि वनाग्नि की घटनाओं से निपटने में कोई कोताही न हो।नियमित
स्टाफ बाहरवनाग्नि से निपटने के लिए वन विभाग कुमाऊं में अनुबंध के आधार पर 2,620 फायर वाचर रखने की योजना पर काम कर रहा है। इनमें से कई की संवेदनशील इलाकों में तैनाती भी हो चुकी है। सबसे अधिक 395 फायर वाचर चम्पावत, 322 नैनीताल और 263 अल्मोड़ा वन प्रभाग में रखे जाने हैं। विरोधाभास यह है कि जहां विभाग आग बुझाने के लिए बाहरी मदद ले रहा है, वहीं अपने नियमित और जिम्मेदार कर्मचारियों को जनगणना जैसे गैर-वानिकी कार्यों में भेज रहा है।नियमों और सुप्रीम कोर्ट की रोक की अनदेखीवन अधिकारियों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि फायर सीजन के संवेदनशील समय में वन कर्मियों की ड्यूटी किसी भी गैर-वानिकी कार्य में नहीं लगाई जाएगी। फॉरेस्ट मैनुअल और विभागीय नियमावली भी यही कहती है कि आग के खतरे के दौरान फील्ड स्टाफ का पूरा ध्यान केवल वनों की सुरक्षा पर केंद्रित होना चाहिए।पांच दिनों में दोगुना हुआ तापमान, घट गई नमीमौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। बीते दिनों हुई बारिश से जंगलों में नमी बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन तीखी धूप ने नमी को सोख लिया है। बीते आठ अप्रैल अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस और नमी 90% थी। वहीं 12 अप्रैल को 33.1° डिग्री सेल्सियस तापमान और नमी मात्र 21% दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ेगी।अप्रैल के दूसरे हफ्ते से जंगल आग के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो जाते हैं। इसे देखते हुए फायर वाचरों की तैनाती की जा रही है। वन कर्मियों को जनगणना कार्य में लगाए जाने का निर्णय मुख्यालय स्तर पर होता है। हम ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं कि जनगणना का कार्य भी सुचारू रहे और वनाग्नि प्रबंधन में भी कोई बाधा न आए।-डॉ. तेजस्विनी पाटिल, मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊं
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