सड़ी-गली लावारिस लाशों की पहचान के लिए एआई का सहारा
कुमाऊं मंडल में अज्ञात शवों की पहचान के लिए पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया है। खराब चेहरों का स्केच तैयार कर पुलिस मृतक के परिजनों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। ऊधमसिंह नगर में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

संतोष जोशी हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल में अज्ञात शवों की शिनाख्त के लिए पुलिस ने आधुनिक तरीका अपनाया है। अक्सर दुर्घटनाओं, हत्या या पुराने मामलों में मिलने वाली लावारिस लाशें इतनी सड़ी-गली हो जाती हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए अब पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा ले रही है।
नई डिजिटल तकनीक
नई डिजिटल तकनीक के मुताबिक बुरी तरह खराब हो चुके चेहरों का एआई सॉफ्टवेयर की मदद से दोबारा खाका (स्केच) तैयार किया जा रहा है। पुलिस तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से मृत महिला या पुरुष के चेहरे को तीन अलग-अलग एंगल (फ्रंट और साइड प्रोफाइल) से री-क्रिएट कर रही है। एआई तकनीक चेहरे के मूल ढांचे, हड्डियों की बनावट और अन्य शारीरिक विशेषताओं का विश्लेषण कर एक संभावित और साफ-सुथरी तस्वीर जेनरेट कर देती है। जिससे व्यक्ति के जीवित रहने के समय के असली चेहरे का अंदाजा लगाया जा सकता है।
यूएस नगर पुलिस ने लिया सहारा
इस आधुनिक तकनीक का पहला प्रयोग ऊधमसिंह नगर जिले के दिनेशपुर में किया गया है। यहां पुलिस को एक महिला का क्षत-विक्षत शव मिला। मृतक का एआई की मदद से फोटो तैयार किया गया। पुलिस ने इस एआई-जेनरेटेड तस्वीर को सोशल मीडिया और अन्य थानों में सर्कुलेट कर दिया है, ताकि मृतक के परिजनों का पता लगाया जा सके। साथ ही 50 हजार इनाम की भी घोषणा की है।
200 से अधिक लाशों की अज्ञात में अंत्येष्टि
सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गौनिया ने पिछले दो साल में अलग-अलग जगहों पर 200 से अधिक अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार कराए हैं। इन शवों की 70 घंटे के बाद भी शिनाख्त नहीं हुई थी।
लावारिस और विकृत हो चुके शवों की पहचान करना हमेशा से बड़ी चुनौती रहा है। अब एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो वैज्ञानिक आधार पर चेहरे का सटीक पुनर्निर्माण करता है। हमारा उद्देश्य इस तकनीक के जरिए न सिर्फ अज्ञात शवों को उनकी पहचान दिलाना है, बल्कि छिपे हुए अपराध और हत्या के मामलों का भी जल्द से जल्द पर्दाफाश करना है।
रिद्धिम अग्रवाल, आईजी कुमाऊं।
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