Haldwani News: चार मौतों से भड़के लोग, बोले- आखिर कब जागेगा 'सिस्टम'
Haldwani News: हल्द्वानी। बरेली रोड स्थित गोरापड़ाव-तीनपानी फ्लाईओवर पर लगातार हो रहे भीषण सड़क हादसों

Haldwani News: हल्द्वानी। बरेली रोड स्थित गोरापड़ाव-तीनपानी फ्लाईओवर पर लगातार हो रहे भीषण सड़क हादसों के बाद लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। शनिवार रात हुए दर्दनाक हादसे में चार युवकों की मौत और बीते नौ दिनों में सात लोगों की जान जाने के बाद स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने राष्ट्रीय राजमार्ग की डिजाइन, ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एनएच पर हादसे न थमने से गुस्साये लोगों का कहना है कि सफर आसान बनाने के लिए बनाया गया फ्लाईओवर अब स्थानीय लोगों के लिए 'मौत का हाईवे' बन गया है। खराब डिजाइनिंग पर उठे सवालप्रधान संगठन नैनीताल के जिलाध्यक्ष गोपाल सिंह अधिकारी ने कहा कि ऐसा विकास किसी काम का नहीं, जो जनता के लिए खौफ और विनाश का कारण बन जाए।
खराब प्लानिंग के चलते अधिकांश ट्रैफिक संकरी सर्विस रोड पर आ गया है, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।हाईवे पर गुजरने से डर रहे ग्रामीणबेरीपड़ाव के प्रधान प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह मलवाल ने कहा कि दोषपूर्ण डिजाइन, मनमाने कट और फाइलों तक सीमित सुधारों से जनता का भरोसा टूट चुका है। अब लोगों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले सुधार चाहिए।निरीक्षण नहीं, स्थायी समाधान चाहिएगोरापड़ाव निवासी सचिन कुमार ने कहा कि हर हादसे के बाद अधिकारी केवल औपचारिक निरीक्षण करते हैं। पूरे फ्लाईओवर की डिजाइन में सुधार कर इसे सुरक्षित बनाया जाना चाहिए।ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ेंग्राम पंचायत जयपुर खीमा की निवासी कीर्ति पाठक ने ब्लैक स्पॉट पर रंबल स्ट्रिप्स, रिफ्लेक्टिव साइनेज और अन्य सुरक्षा उपाय तत्काल लागू करने की मांग की।स्टंटबाजी और तेज रफ्तार पर लगे रोकहरिपुर तुलाराम निवासी गोपाल राम ने कहा कि रात के समय स्टंटबाजी और तेज रफ्तार पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि हादसों पर अंकुश लगाया जा सके।जनता का धैर्य जवाब दे चुकाहरिपुरा तुलाराम के वरिष्ठ नागरिक हीरा लाल ने कहा कि कई परिवार अपने चिराग खो चुके हैं, लेकिन व्यवस्था अब भी नहीं जागी है।फ्लाईओवर पर पार्टी और शराबखोरी रुकेगोरापड़ाव निवासी कार्तिक कार्की ने कहा कि फ्लाईओवर देर रात पार्टी और शराबखोरी का अड्डा बनता जा रहा है, जिस पर सख्ती जरूरी है।सर्विस लेन में सुधार की जरूरततीनपानी बाईपास निवासी रवि गोस्वामी ने कहा कि दोषपूर्ण डिजाइन और सर्विस लेन पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव के कारण यह हिस्सा स्थायी ब्लैक स्पॉट बन चुका है।इमरजेंसी कॉल बॉक्स हों पूरी तरह सक्रियस्थानीय निवासी एवं अधिवक्ता टीका सिंह रावत ने कहा कि हाईवे पर लगे इमरजेंसी कॉल बॉक्स हर समय सक्रिय रहने चाहिए। इनके उपयोग को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि हादसे के समय लोगों को तत्काल सहायता मिल सके।चार मौतों से भड़के लोग, बोले-आखिर कब जागेगा ‘सिस्टम’- कहा, मौत का हाईवे बना गोरापड़ाव फ्लाईओवर..- दोषपूर्ण डिजाइन और सर्विस रोड पर ट्रैफिक दबाव को बताया हादसों की बड़ी वजह- निरीक्षण, आश्वासन और बैठकों के बावजूद नहीं दिखा स्थायी समाधान, ब्लैक स्पॉट सुधारने की उठी मांग- इमरजेंसी कॉल बॉक्स भी प्रभावी नहीं, जागरूकता और सक्रिय संचालन पर उठे सवालहल्द्वानी, संवाददाता। बरेली रोड स्थित गोरापड़ाव-तीनपानी फ्लाईओवर पर लगातार हो रहे भीषण सड़क हादसों ने आम लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। नौ दिन में सात लोगों की मौत के बाद स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने राष्ट्रीय राजमार्ग की डिजाइन, ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि सफर आसान बनाने के उद्देश्य से बना यह फ्लाईओवर अब स्थानीय लोगों के लिए खौफ का पर्याय बन गया है। उनका आरोप है कि निरीक्षण, बैठकों और आश्वासनों का सिलसिला तो लगातार चलता है, लेकिन धरातल पर ऐसे सुधार नहीं दिखते जो हादसों की रफ्तार रोक सकें।गोरापड़ाव और तीनपानी क्षेत्र में शनिवार रात हुए दर्दनाक हादसे के बाद पूरे इलाके में आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे के दोषपूर्ण ज्यामितीय डिजाइन, सर्विस रोड पर अत्यधिक ट्रैफिक दबाव, मनमाने कट, अपर्याप्त संकेतक और तेज रफ्तार पर प्रभावी नियंत्रण न होने के कारण यह पूरा स्ट्रेच स्थायी ब्लैक स्पॉट का रूप ले चुका है। लोगों का आरोप है कि मुख्य कैरिज-वे की तुलना में अधिकांश यातायात सर्विस रोड पर आ गया है, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।--------------------------एनएच की खराब डिजाइनिंग में दोषप्रधान संगठन नैनीताल जिलाध्यक्ष गोपाल सिंह अधिकारी का कहना है कि ऐसा विकास किसी काम का नहीं, जो स्थानीय जनता के लिए विनाश और खौफ का दूसरा नाम बन जाए। उन्होंने कहा कि रोज क्षेत्र के लोग और स्कूली बच्चे इस मार्ग से गुजरते हैं और हर समय अनहोनी का डर बना रहता है। अधिकारियों को वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर यह देखना चाहिए कि खराब प्लानिंग के कारण अधिकांश ट्रैफिक संकरी सर्विस रोड पर रेंग रहा है।------------------हाईवे पर गुजरने से डर रहे ग्रामीणदुर्गापालपुर परमा, बेरीपड़ाव के प्रधान प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह मलवाल का कहना है कि दोषपूर्ण डिजाइन, मनमाने कट और फाइलों तक सीमित सुधारों के कारण जनता अब इस हाईवे पर जाने से भी डरने लगी है। अब लोगों को खोखले आश्वासनों की नहीं बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले सुधारों की जरूरत है।-------------------अफसरों का निरीक्षण सिर्फ हवा-हवाईगोरापड़ाव निवासी सचिन कुमार का कहना है कि इस हाईवे पर न जाने कितने युवाओं ने अपनी जान गंवा दी, लेकिन प्रशासन हर हादसे के बाद केवल औपचारिक निरीक्षण करता है। उनका कहना है कि पूरा स्ट्रेच मौत के जाल जैसा बन गया है और डिजाइन में सुधार करते हुए इसे आगे मोतीनगर से जोड़ा जाना चाहिए।--------------------------ब्लैक स्पॉट पर रंबल स्ट्रिप्स और उचित साइनेज नहींग्राम पंचायत जयपुर खीमा की निवासी कीर्ति पाठक ने कहा कि जनता ने कई बार शिकायतें कीं और अधिकारियों ने हर बार बड़े-बड़े आश्वासन दिए, लेकिन सुधार के नाम पर कुछ नहीं हुआ। जब तक ब्लैक स्पॉट पर रंबल स्ट्रिप्स और उचित साइनेज नहीं लगाए जाते, विरोध जारी रहेगा।---------------एनएच पर स्टंटबाजी-रीलबाजी पर सख्ती से रोक लगेहरिपुर तुलाराम के स्थानीय निवासी गोपाल राम का कहना है कि फ्लाईओवर बनने से पहले क्षेत्र में इतनी भीषण दुर्घटनाएं नहीं होती थीं। अब घर से निकलते समय भी डर बना रहता है कि कहीं कोई अनियंत्रित वाहन टक्कर न मार दे। उन्होंने रात के समय स्टंटबाजी और तेज रफ्तार पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की।-----------------------जनता का धैर्य दे रहा जवाबहरिपुरा तुलाराम के वरिष्ठ नागरिक हीरा लाल ने कहा कि इस दोषपूर्ण व्यवस्था के कारण कई परिवार अपने चिराग खो चुके हैं। उनका कहना है कि शासन-प्रशासन शायद किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, जबकि जनता का धैर्य अब जवाब दे चुका है।----------------------फ्लाईओवर पर पार्टी-मस्ती का अड्डा न बनने पायेगोरापड़ाव निवासी कार्तिक कार्की ने कहा कि तीनपानी बाईपास फ्लाईओवर बनने के बाद यह स्थान केवल सड़क नहीं रहा बल्कि शराब पीने और जन्मदिन मनाने का अड्डा भी बन गया है। इससे लगातार हादसे हो रहे हैं और स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।--------------------------एनएच के सर्विस लेन में सुधार होतीनपानी बाईपास निवासी रवि गोस्वामी का कहना है कि हाईवे के दोषपूर्ण ज्यामितीय डिजाइन और सर्विस लेन पर पूरे ट्रैफिक के बॉटलनेक होने से यह मार्ग स्थायी ब्लैक स्पॉट बन चुका है। उनके अनुसार एनएचएआई और संबंधित एजेंसियों के प्रशासनिक आश्वासन अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके हैं और यह स्थिति सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा पर असर डाल रही है।------------------------इमरजेंसी कॉल बॉक्स भी नहीं निभा पा रहे पूरी भूमिकाहल्द्वानी। लगातार हो रहे हादसों के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगाए गए इमरजेंसी कॉल बॉक्स भी चर्चा में हैं। दुर्घटना की स्थिति में त्वरित सहायता के लिए लगाए गए इन सोलर संचालित कॉल बॉक्स में एक बटन दबाकर सीधे हाईवे कंट्रोल रूम से संपर्क किया जा सकता है। इनमें इन-बिल्ट माइक्रोफोन, स्पीकर और जीपीएस आधारित लोकेशन सिस्टम मौजूद है, जिससे दुर्घटना स्थल की सटीक जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंचती है और एम्बुलेंस या क्रेन तुरंत भेजी जा सकती है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इनकी जानकारी और उपयोग को लेकर व्यापक जागरूकता नहीं है।स्थानीय निवासी एवं अधिवक्ता टीका रावत का कहना है कि प्रशासन को इन आपातकालीन कॉल बॉक्स को पूरी तरह सक्रिय रखने के साथ-साथ इनके उपयोग का व्यापक प्रचार-प्रसार भी करना चाहिए, ताकि दुर्घटना के समय लोग बिना देरी के तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें।हादसा :::::बातचीतहल्द्वानी, संवाददाता। ऐसा विकास भी क्या, जो अब स्थानीय जनता के लिए विनाश और खौफ का दूसरा नाम बन चुका है...यह कहना है प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष गोपाल सिंह अधिकारी का। उन जैसे ही अन्य लोगों का कहना है कि बरेली रोड और खासकर गोरापड़ाव का वो फ्लाईओवर क्षेत्र, जिसे कभी सफर को आसान बनाने के लिए तैयार किया गया था, वो आज मौत का हाईवे बन चुका है। आए दिन इस मार्ग पर किसी न किसी घर का चिराग बुझ रहा है, किसी मांग का सिंदूर उजड़ रहा है, लेकिन शासन से लेकर प्रशासन तक सब के सब गहरी नींद में सोए हैं। अब तो लोगो का भी कहना है कि आखिर प्रशासन को जागने के लिए और कितनी मौतों का इंतजार है... स्थानीय लोगों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है और उनका यह गुस्सा पूरी तरह जायज भी है। हाईवे की इंजीनियरिंग में इतनी बड़ी खामी है कि मुख्य हाईवे पर सिर्फ 20 प्रतिशत गाड़ियां दौड़ रही हैं, जबकि 80 प्रतिशत ट्रैफिक का पूरा दबाव सर्विस रोड पर आ चुका है। हालात ये हैं कि पहले जब यह हाईवे नहीं बना था, तब यहां इतने भीषण हादसे नहीं होते थे। लोग शिकायत करते हैं, तो अधिकारी आते हैं, मौका-मुआयना होता है, बड़े-बड़े आश्वासन दिए जाते हैं लेकिन अगले ही दिन अखबार के पन्नों पर इस फ्लाइओवर में हुई एक और दर्दनाक मौत की खबर छप जाती है। वहीं हिंदुस्तान ने इस पूरे मामले में कई लोगों से वार्ता कर उनकी राय जानी।इनसेटइमरजेंसी कॉल बॉक्स नहीं कर रहे कामहल्द्वानी, संवाददाता। तीनपानी बाईपास फ्लाईओवर पर लगातार हो रहे जानलेवा हादसों के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे इमरजेंसी कॉल बॉक्स को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। मौत का हाईवे बन चुके इस मार्ग पर दुर्घटना की त्वरित सूचना देने के लिए यह सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन जागरूकता के अभाव में लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। एक बटन दबाकर सीधे हाईवे कंट्रोल रूम से संपर्क किया जा सकता है। सोलर पावर से चलने वाले इन आधुनिक बूथों में इन-बिल्ट माइक और स्पीकर होता है, जिससे पीड़ित सीधे अधिकारी से बात कर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि बटन दबाते ही जीपीएस के जरिए कंट्रोल रूम को दुर्घटना स्थल की सटीक लोकेशन मिल जाती है, जिससे एम्बुलेंस या क्रेन तुरंत मौके पर भेजी जा सकती है। स्थानीय निवासी टिका रावत का कहना है कि प्रशासन को इन आपातकालीन बूथों को पूरी तरह सक्रिय रखने के साथ-साथ इनका प्रचार-प्रसार भी करना चाहिए ताकि किसी भी हादसे के वक्त बिना वक्त गंवाए तुरंत मदद बुलाई जा सके।


