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1 जुलाई, 2020|5:43|IST

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कोरोनिल पर केंद्र-प्रदेश सरकार और पंतजलि समेत छह को नोटिस

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योग गुरु रामदेव की ओर से कोरोना के इलाज की दवा कोरोनिल लॉन्च किए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र, प्रदेश सरकार, निदेशक आयुर्वेदिक यूनानी उत्तराखंड, पतंजलि योगपीठ, आईसीएमआर और निम्स विश्वविद्यालय राजस्थान को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए एक सप्ताह बाद की तिथि तय की है। हाईकोर्ट अधिवक्ता मणि कुमार ने अपनी जनहित याचिका में कहा है कि पतंजलि योगपीठ की कंपनी दिव्य फार्मेसी ने महामारी कोरोना का इलाज करने वाली कोरोनिल दवा बनाने का दावा किया है। रामदेव ने सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के साथ बीते मंगलवार हरिद्वार में यह दवा लांच की, लेकिन उन्होंने इस संबंध में नियमों का अनुपालन नहीं किया। प्रचार-प्रसार पर रोक लगाई जाए याचिकाकर्ता का कहना है कि स्वामी रामदेव लोगों के बीच दवा का भ्रामक प्रचार कर रहे हैं। इसके इस्तेमाल से शरीर में क्या साइडइफेक्ट होंगे, इसकी भी पुष्ट जानकारी नहीं है। न इससे संबंधित जानकारी या इतिहास है। अधिवक्ता ने इस दवा पर रोक की मांग की है। आईसीएमआर की गाइड लाइनों के इतर भ्रामक प्रचार पर कार्यवाही की भी मांग की गई है।

चार बिंदुओं पर दवा को चुनौती

1- दवा कंपनी ने आईसीएमआर की गाइडलाइन का पालन नहीं किया।

2- दवा के लिए आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की अनुमति नहीं ली गई।

3- कंपनी ने उत्तराखंड राज्य आयुष विभाग के यहां दवा के लिए आवेदन नहीं किया है। जो आवेदन था, वह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा बनाने का था। जबकि दावा कोरोना के इलाज की दवा का किया गया है।

4-कंपनी ने निम्स विवि, राजस्थान की ओर से दवा परीक्षण करना बताया। निम्स ने इससे इनकार कर दिया है।

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  • Web Title:Notice to six including the Center-state government and Pantjali on coronil