
रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चम्पावत में बनेंगे रेस्क्यू सेंटर
रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चम्पावत में बनेंगे रेस्क्यू सेंटर मोहन भट्ट हल्द्वानी। उत्तराखंड में लगातार
रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चम्पावत में बनेंगे रेस्क्यू सेंटर मोहन भट्ट हल्द्वानी। उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष, खासकर गुलदारों (तेंदुओं) के हमलों से निपटने के लिए वन विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में नए रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ये रेस्क्यू सेंटर रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चम्पावत जिलों में बनाए जाएंगे। राज्य में बाघ, गुलदार और भालू इंसानों पर लगातार हमलावर हो रहे हैं। हमलावर वन्यजीवों को वन विभाग पकड़ कर रेस्क्यू सेंटर में रखता है। लगातार बढ़ती घटनाओं के बीच वन विभाग ने इतने वन्यजीव पकड़ लिए हैं कि उन्हें रखने के लिए रेस्क्यू सेंटरों में अब जगह ही नहीं बची है।
इसकी वजह से अब वन विभाग वन्यजीवों को रेस्क्यू करने से बचने भी लगा है। वर्तमान में राज्य में चार प्रमुख रेस्क्यू सेंटर अल्मोड़ा, ढेला रामनगर, रानीबाग हल्द्वानी और चिड़ियापुर हरिद्वार में संचालित हैं। इन सभी केंद्रों में क्षमता से काफी अधिक वन्यजीव रखे गए हैं। इधर नए रेस्क्यू सेंटर बनाने के लिए वन विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चम्पावत जिलों में एक-एक रेस्क्यू सेंटर बनाया जाना है। हर सेंटर में 36 गुलदारों को रखने की क्षमता होगी। मामले में उत्तराखंड वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) दिल्ली में केन्द्र सरकार के आला अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिथौरागढ़, चम्पावत और रुद्रप्रयाग जैसे संघर्ष-प्रवण इलाकों में नए सेंटर बनने से रेस्क्यू ऑपरेशन तेज होंगे और वन्यजीवों को सुरक्षित रखना आसान होगा। दो सेंटरों की क्षमता बढ़ाने की मिली अनुमति केन्द्र सरकार ने ढेला रामनगर और चिड़ियापुर हरिद्वार स्थित रेस्क्यू सेंटरों में वन्यजीवों को रखने की क्षमता बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इन दोनों सेंटर में अब 16-16 वन्यजीव और रखे जा सकेंगे। चारों रेस्क्यू सेंटर पूरी तरह पैक रामनगर के ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर में 20 बाघ और गुलदार को रखा जा सकता है लेकिन वर्तमान में वहां 24 बाघ और गुलदार रखे गए हैं। वहीं अल्मोड़ा स्थित मृग विहार रेस्क्यू सेंटर में 10 गुलदारों को रखने की क्षमता है। वहां भी वर्तमान में 13 गुलदार हैं। चिड़ियापुर हरिद्वार में 18 वन्यजीव रखने की क्षमता है वहां 20 वन्यजीव रखे गए हैं। ऐसी ही हालत रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर की भी है। कुछ समय पूर्व रुद्रप्रयाग से रेस्क्यू कर लाए एक गुलदार को जगह नहीं होने पर लौटाना पड़ा था। रुद्रप्रयाग, चम्पावत और पिथौरागढ़ में नए रेस्क्यू सेंटर बनाने हैं। इसके लिए केन्द्र से अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वहीं ढेला और चिड़ियापुर स्थित रेस्क्यू सेंटरों की क्षमता बढ़ाने की केंद्र ने अनुमति दे दी है। इस दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। रंजन कुमार मिश्र, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ), उत्तराखंड वन विभाग

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