
नेपाल में संवैधानिक व्यवस्था बदलने से ही पूरी होगी युवाओं की उम्मीदे
नेपाल में अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने युवाओं को रोजगार, पलायन और भ्रष्टाचार के खिलाफ नई उम्मीद दी है। युवा नीति को लागू करने की आवश्यकता है, जिससे युवा जन विद्रोह को सफल बनाया जा सके।...
नेपाल में बदलाव: - अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने युवा पीढ़ी को दी उम्मीद की नई किरण - नेपाल में राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार बन सकती है युवा नीति - युवाओं की मांग, बेरोजगारी और पलायन रोकने को अंतरिम सरकार शुरू करे काम जहांगीर राजू हल्द्वानी। नेपाल में जन विद्रोह के बाद बनी अंतरिम सरकार से युवाओं को कई उम्मीदें हैं। युवाओं की उम्मीदों को तभी पंख लगेंगे जब पलायन, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए संविधान में नई व्यवस्था की जाए। नेपाल के युवाओं को उम्मीद है कि इस तख्तापलट को जनक्रांति के रूप में देखा जाएगा।

नेपाल में सुशीला कार्की के अंतरिम प्रधानमंत्री बनने से युवाओं को उम्मीद है कि अब उनकी मांग के अनुरूप सरकार कार्य करेगी। भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर संविधान में ठोस व्यवस्था की जाएगी। अन्यथा नेपाल में पूर्व में हुई कम्युनिस्ट क्रांति की तरह यह क्रांति भी निरर्थक रह जाएगी। नेपाल के सोशल एक्टिस्ट महेन्द्र बहादुर कहते हैं कि अंतरिम सरकार में आयोग के माध्यम से नेताओं के भ्रष्टाचार की जांच होगी। यह स्थिति जेन-जी आंदोलन की बड़ी जीत के रूप में देखी जा रही है। अंतरिम सरकार को युवाओं के रोजगार और पलायन रोकने के लिए भी संविधान में उचित व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने कहा कि छह माह में होने वाले संसदीय चुनाव के बाद बनने वाली सरकार इन मुद्दों पर कार्य करना चाहिए। भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ होगी कार्रवाई नेपाल मूल के एक्टिविस्ट महेश बराल बताते हैं कि युवा विद्रोह के बाद बनी अंतरिम सरकार पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करना है। इसके लिए नेपाल में जल्द ही आयोग अस्तित्व में आएगा। आयोग के माध्यम से भ्रष्टाचार में शामिल नेपाल के सभी बड़े नेताओं की संपत्ति की जांच होगी। इसी क्रम में नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली शर्मा के खिलाफ मुकद्मा दर्ज किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इसे नेपाल में युवा जन विद्रोह की बड़ी सफलता के रूप में देखा जाएगा। अंतरिम सरकार पर दबाव: राजनीतिक विश्लेषक राजेन्द्र अवस्थी कहते हैं कि नेपाल की अंतरिम सरकार पर युवाओं के मुद्दों पर काम करने का सबसे अधिक दबाव होगा। इसके लिए अंतरिम सरकार में शामिल होने वाली टीम और व्यवस्था की जिम्मेदारी होगी कि वह देश में भ्रष्टाचार, पलायन व बेरोजारी के मुद्दे को संवैधानिक व्यवस्था में शामिल करे।

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