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 संसाधनों को तरस रहा ‘अर्जुन, रोशनी की उम्मीदें धुंधली

संसाधनों को तरस रहा ‘अर्जुन, रोशनी की उम्मीदें धुंधली

संक्षेप:

हल्द्वानी। डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में करीब तीन वर्ष पूर्व स्थापित कुमाऊं का पहला

Sep 08, 2025 12:05 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, हल्द्वानी
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हल्द्वानी। डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में करीब तीन वर्ष पूर्व स्थापित कुमाऊं का पहला सरकारी अर्जुन नेत्र बैंक संसाधनों और डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। बीते तीन वर्षों में बैंक ने 126 कॉर्निया संग्रहित किए, जिनमें से 93 कॉर्निया उपयुक्त पाए गए और इनके माध्यम से 93 लोगों की आंखों को रोशनी जरूर मिली, लेकिन 100 से अधिक मरीज अभी भी कॉर्निया प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में हैं। अगर संसाधन बेहतर होते यह बैंक और लोगों को रोशनी दे सकता है। 26 अगस्त 2022 को एसटीएच के नेत्र बैंक में पहला कॉर्निया प्रत्यारोपण हुआ था। तब उम्मीद जगी थी कि यह नेत्र बैंक न केवल कुमाऊं बल्कि अन्य राज्यों के मरीजों की आंखों को भी रोशनी देगा, लेकिन अपेक्षाओं के विपरीत तीन वर्षों में मात्र 126 कॉर्निया ही संग्रहित हो पाए हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि नेत्र बैंक से जितनी उम्मीदें थीं, वह पूरी नहीं हो सकीं। नेत्रदान के प्रति जागरूकता की कमी अस्पताल प्रबंधन मरीजों और उनके तीमारदारों को नेत्रदान का महत्व समझाने में असफल रहा। अस्पताल के भीतर नेत्रदान के लिए प्रचार-प्रसार नहीं हो रहा, बाहरी क्षेत्रों की तो बात ही दूर है। यदि अस्पताल में इलाज के दौरान मृत मरीजों के परिजनों की उचित काउंसलिंग की जाए, तो कई कॉर्निया प्राप्त हो सकते हैं। इस दिशा में न तो नेत्र रोग विभाग और न ही अस्पताल प्रबंधन रुचि दिखा रहा है। सामाजिक संस्थाएं भी नेत्रदान जागरूकता अभियान में सक्रिय नहीं हैं। संसाधनों का अभाव नेत्र बैंक के पास अपना वाहन नहीं है। कॉर्निया दान के लिए फोन आने पर कर्मचारियों को एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ता है। कई बार स्टाफ को डॉक्टर की गाड़ी या बाइक से ही कॉर्निया लेने जाना पड़ता है। डॉक्टरों की कमी से बढ़ी मुश्किलें नेत्र रोग विभाग में कॉर्निया निकालने और प्रत्यारोपण करने वाले विशेषज्ञों की भारी कमी है। विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. जीएस तितियाल के रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य बनने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। वर्तमान में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नितिन मेहरोत्रा अकेले कॉर्निया प्रत्यारोपण का कार्य देख रहे हैं। दो सहायक प्रोफेसरों के साथ विभाग में डॉक्टरों पर काम का अत्यधिक दबाव है, जिसके चलते नेत्र बैंक की गतिविधियों को गति नहीं मिल पा रही। --- एसटीएच के नेत्र बैंक को और बेहतर बनाने के लिए हर संभव ठोस प्रयास किए जाएंगे। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की आंखों को रोशनी दी जा सके। नेत्रदान के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष रणनीति बनाई जाएगी। -डॉ. आर राजेश कुमार, चिकित्सा शिक्षा सचिव, उत्तराखंड