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हर माह 6 लाख के नुकसान में चल रहा केएमओयू प्रबंधन

हर माह 6 लाख के नुकसान में चल रहा केएमओयू प्रबंधन

कुमाऊं मोटर ओनर्स यूनियन लिमिटेड (केमू) के पहिये ‘पीछे की ओर दौड़ रहे हैं। यानी केमू प्रबंधन फायदे के बजाए कर्ज के बोझ में दबता जा रहा है। इसका सीधा असर केमू से जुड़े 104 कर्मचारियों पर पड़ रहा है। वेतन के साथ अन्य भुगतान नहीं होने से कर्मचारी परेशान हैं।

1939 में गठित केमू की बसें आज भी पर्वतीय क्षेत्रों में सुलभ और सुरक्षित यात्रा कराती हैं। पहाड़ की लाइफलाइन के रूप में पहचान रखने वाली केमू की हालत पिछले चार साल से ज्यादा खस्ताहाल हो रही है। केमू के सिर पर करीब कर्मचारियों के भुगतान और वेतन संबंधी छह करोड़ रुपये की देनदारी है, जो रोजना बढ़ रही है। केमू से 310 बसे हल्द्वानी और 80 बसे रामनगर की जुड़ी हुई है। करीब 250 रूट पर केमू की गाड़ियां चलती हैं। इन बसों में सफर करने वाले यात्रियों के प्रति टिकट से साढ़े छह प्रतिशत हिस्सा केमू के खाते में जाता है, ताकि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जाए। वर्तमान में केमू की प्रतिमाह आमदानी करीब 6 लाख रुपया है, जबकि देनदारी करीब 12 लाख रुपया है। ऐसे में कर्मचारियों को पिछले काफी समय से वेतन नहीं मिला है।

प्रबंधन घाटे के लिए जिम्मेदार

कर्मचारी घाटे पर जाने के लिए प्रबंधन को सीधे तौर पर जिम्मेदार बताते हैं। स्टेशन इंचार्ज गोपाल दत्त दुम्का कहते हैं कि कंडक्टर जो भी टिकट काटता है, उसे वे-बिल में लिखा जाना चाहिए। इसी वे-बिल में चढ़े टिकटों के अनुसार ही केमू को टिकट से प्रतिशत मिलता है। कंडक्टर वे-बिल में टिकट नहीं चढ़ाते, इसके चलते चेकिंग करने के लिए टीम फील्ड में लगाई जाती है। बसें प्रबंधन के सदस्यों की हैं, ऐसे में चालक परिचालक जांच के लिए बसों को रोकते नहीं हैं। कभी चेकिंग हो भी गई तो मात्र 500 रुपये का जुर्माना लगा कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है। इसके चलते केमू को उसका आधा हिस्सा भी नहीं मिल पाता, जिससे केमू घाटे में चल रही है।

रिसीवर तैनात होने से सुधरे थे हालात

केमू की खराब माली हालत को देखते हुए जिला प्रशासन ने केमू प्रबंधन को हटा कर बतौर रिसीवर एसडीएम को तैनात किया था। इसके बाद सख्ती के साथ केमू की बसों में चेकिंग की गई। चालक-परिचालकों को उनके लाइसेंस कैंसल करने और गाड़ी मालिक को परमिट कैंसल करने की चेतावनी दी गई। इसके बाद यात्रियों के टिकटों को वे-बिल में चढ़ाया जाने लगा। कुछ ही महीनों में हालत सुधर गए थे। पर, रिसीवर के हटते ही स्थितियां बिगड़ गईं।

प्रशासन से रिसीवर नियुक्त करने की मांग

बीते दिनों कई महीने से वेतन नहीं मिलने से गुस्साए केमू कर्मयारियों ने बीते दिनों सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय से मुलाकात की। सिटी मजिस्टेट्र पंकज उपाध्याय ने कर्मचारियों से ऑफिस के सभी दस्तावेज लाने के बाद अग्रिम कार्रवाई की बात कही है।

डग्गामारी के चलते केमू की सवारियां कम हुई हैं, जिससे घाटा बढ़ा है। इसके अलावा केमू प्रबंधन से जुड़े लोग और वाहन स्वामी भी नियमों को ताक पर रख कर बसें चला रहे हैं, जिससे केमू घाटे में जा रही है। मामले की पूरी जानकारी प्रशासन को दी गई है।

महेश चन्द्र सिंह बिष्ट, कार्यकारी निदेशक, केमू

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  • Web Title:KMOU management going on in loss of Rs 6 lakh per month