DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

खेतीखान निवासी प्रख्यात साहित्यकार हिमांशु जोशी का निधन

खेतीखान निवासी प्रख्यात साहित्यकार हिंमांशु जोशी का निधन हो गया है। 83 वर्षीय हिमांशु जोशी लंबे समय से बीमार थे। गुरुवार रात दिल्ली में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके निधन से इलाके में शोक की लहर है।
हिंमांशु जोशी का जन्म 4 मई 1935 को खेतीखान के जोस्यूडा गांव में हुआ था। उन्होंने दिल्ली में साप्ताहिक हिन्दुस्तान से रिपोर्टिंग का सफर शुरू किया। उनका उपन्यास कगार की आग विश्व प्रसिद्ध है। हिमांशु जोशी के चले जाने से साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। हिमांशु जोशी प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्णानन्द जोशी के पुत्र थे। इनकी माता का नाम तुलसी देवी था। उनका बालपन जोस्यूड़ा से कही अधिक खेतीखान में बीता। लोहाघाट से अल्मोड़ा जाने वाली सड़क के किनारे बसे इस कस्बे में सब ठीकठाक चल रहा था कि वर्ष 1951 में इनके पिता का निधन हो गया। उनकी कक्षा 8 तक की पढ़ाई खेतीखान के हिंदुस्तानी वर्नाकुलर स्कूल खेतीखान में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वह नैनीताल चले गए। पांच साल वह नैनीताल में रहे। 
वर्ष 1956 से पत्रकारिता में कदम रखा। ‘कादम्बिनी’(1968-71), वरिष्ठ पत्रकार ‘साप्ताहिक हिन्दुस्तान’(1971-1993)। दूरदर्शन व आकाशवाणी के लिए भी कार्य किया। हिन्दी फिल्मों में भी लेखन कार्य किया। हिमांशु जोशी के तीन पुत्र अमित, सिद्धार्थ और असित हैं। हिमांशु जोशी को हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू का अच्छा ज्ञान था। उनके उपन्यासों में अरण्य, महासागर, छाया मत छूना मन, कगार की आग, समय साक्षी है, तुम्हारे लिए, सु-राज शामिल हैं। उनके कहानी संग्रह-अन्तत: तथा अन्य कहानियाँ, अथचक्र, मनुष्य-चिह्न तथा अन्य कहानियां, जलते हुए डैने तथा अन्य कहानियां,, तपस्या तथा अन्य कहानियां, आंचलिक कहानियां, गंधर्व-गाथा, श्रेष्ठ प्रेम कहानियां आदि हैं। 
कविता संग्रह-नील नदी का वृक्ष, जीवनी तथा खोज-अमर शहीद अशफाक उल्ला खां, यात्रा वृतांत : यातना-शिविर में (अंडमान की अनकही कहानी), रेडियो-नाटक-सु-राज तथा अन्य एकांकी, कागज की आग तथा अन्य एकांकी, समय की शिला पर, बाल साहित्य-अग्नि संतान, विश्व की श्रेष्ठ लोककथाएं, तीन तारे, बचपन की याद रही कहानियां, भारतरत्न : पं. गोविन्द बल्लभ पन्त आदि।

पुरस्कार व सम्मान
‘छाया मत छूना मन’, ‘मनुष्य चिह्न’, ‘श्रेष्ठ आंचलिक कहानियां’ तथा ‘गंधर्व-गाथा’ को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान से पुरस्कार। 'हिमांशु जोशी की कहानियां’ तथा ‘भारत रत्न: पं. गोबिन्द बल्लभ पन्त’ को हिन्दी अकादमी, दिल्ली का सम्मान। ‘तीन तारे’ राजभाषा विभाग, बिहार द्वारा पुरस्कृत। पत्रकारिता के लिए केन्द्रीय हिन्दी संस्थान द्वारा ‘स्व. गणेश शंकर विद्यार्थी’ पुरस्कार से सम्मानित। 
अनेक उपन्यासों, कहानियों के अधिकतर भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, नेपाली, बर्मी, चीनी, जापानी, इटालियन, बल्गेरियाई, कोरियाई, नार्वेजियन, स्लाव, चैक आदि भाषाओं में अनुवाद हुए।
विशेष : उपन्यास ‘सु-राज’ पर आधारित फिल्म बनी। ‘तुम्हारे लिए’ पर आधारित दूरदर्शन धारावाहिक। ‘तर्पण’, ‘सूरज की ओर’ आदि पर टीवी फिल्में। शरत चन्द्र के उपन्यास ‘चरित्रहीन’ पर आधारित रेडियो धारावाहिक का निर्देशन। अनेक सरकारी, अर्द्धसरकारी समितियों में हिन्दी सलाहकार रहे। 
सम्प्रति-स्वतन्त्र लेखन व पत्रकारिता। नार्वे से प्रकाशित पत्रिका ‘शांतिदूत’ के विशेष सलाहकार। हिन्दी अकादमी, दिल्ली की पत्रिका ‘इन्द्रप्रस्थ भारती’ के सम्पादन मंडल के सदस्य रहे।
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Himanshu Joshi a renowned literary resident of Khetikhan passed away