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गंदगी का जंक्शन बना हल्द्वानी रेलवे स्टेशन

गंदगी का जंक्शन बना हल्द्वानी रेलवे स्टेशन

संक्षेप:

हल्द्वानी रेलवे स्टेशन इन दिनों गंदगी और दुर्गंध से भरा हुआ है, जिससे यात्रियों को यहां आना मुश्किल हो गया है। खुले में शौच और कचरे के ढेरों के बीच यात्रियों को ट्रेन का इंतजार करना पड़ रहा है। स्टेशन पर सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी हो रही है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया है।

Feb 09, 2026 12:05 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, हल्द्वानी
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हल्द्वानी, वरिष्ठ संवाददाता। हल्द्वानी रेलवे स्टेशन इन दिनों अपनी पहचान खोकर ‘दुर्गंध के स्टेशन’ में तब्दील होता जा रहा है। स्टेशन परिसर और उसके आसपास पसरी गंदगी ने यात्रियों का यहां आना मुश्किल कर दिया है। स्थिति यह है कि अब यात्री हल्द्वानी के बजाय काठगोदाम रेलवे स्टेशन से सफर करना बेहतर समझ रहे हैं। ‘हिन्दुस्तान’ की टीम ने रविवार को जब स्टेशन का जायजा लिया, तो वहां के हालात बेहद चिंताजनक मिले। खुले में शौच और भारी दुर्गंध स्टेशन के टिकट काउंटर के ठीक बगल में स्थानीय आबादी द्वारा खुले में शौच किए जाने से पूरा परिसर हर समय दुर्गंध से महकता रहता है।

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यात्री नाक पर रुमाल रखकर अपनी ट्रेन का इंतजार करने को मजबूर हैं। रेलवे के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, बारिश के बाद यहां सांस लेना तक दूभर हो जाता है। मुख्य द्वार पर कचरे का अंबार स्टेशन के मुख्य द्वार पर कदम रखते ही कूड़े के ढेर और प्लास्टिक की थैलियां यात्रियों का ‘स्वागत’ करती हैं। सुविधाओं के नाम पर दिव्यांगों के लिए बना शौचालय और सुलभ शौचालय दोनों ही बंद पड़े हैं। मूत्रालय गंदगी से अटे पड़े हैं। इसके अलावा, स्टेशन पर लावारिस कुत्तों का जमावड़ा बना रहता है, जो यात्रियों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्टेशन पर सुरक्षा को लेकर भी बड़ी लापरवाही सामने आती है। यहां लगे अग्निशमन यंत्र तालों में जकड़े हैं, जो आपात स्थिति में किसी काम के नहीं रहेंगे। वहीं, मुख्य गेट के पास खुला बिजली का ट्रांसफार्मर बॉक्स किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। पटरियों के बीच से लोगों का बेरोकटोक गुजरना भी हादसे का कारण बन सकता है। नगर निगम के दावे फेल कुमाऊं का प्रमुख केंद्र होने के नाते यहां से प्रतिदिन 12 से अधिक ट्रेनें और हजारों यात्री गुजरते हैं। नगर निगम ने टिकट काउंटर के पास दो टॉयलेट हैं, लेकिन हजारों की आबादी के सामने ये नाकाफी हैं। रखरखाव के अभाव में ये शौचालय अब इस्तेमाल करने लायक भी नहीं बचे हैं।