बोले हल्द्वानी: काठगोदाम चांदमारी में पेयजल को तरस रही 12 हजार की आबादी, क्षेत्रवासियों में आक्रोश

Newswrap हिन्दुस्तान, हल्द्वानी
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नगर निगम में शामिल होने के बावजूद स्थितियां जस की तस हैं, हमें क्या मिला...? यह सवाल वार्ड 34 काठगोदाम चांदमारी की जनता ने उठाया है। करीब 12 हजार की आ

बोले हल्द्वानी: काठगोदाम चांदमारी में पेयजल को तरस रही 12 हजार की आबादी, क्षेत्रवासियों में आक्रोश

हल्द्वानी, भूपेश कन्नौजिया। नगर निगम में शामिल होने के बावजूद स्थितियां जस की तस हैं, हमें क्या मिला...? यह सवाल वार्ड 34 काठगोदाम चांदमारी की जनता ने उठाया है। करीब 12 हजार की आबादी और साढ़े तीन हजार से अधिक मतदाता वाले इस वार्ड में लोग इन दिनों पानी की गंभीर किल्लत से जूझ रहे हैं। खासकर आदर्श कॉलोनी, चांदमारी (नई और पुरानी दोनों) और कोरता क्षेत्र में पेयजल संकट के कारण आम जनजीवन पटरी से उतर गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी विभागों की लापरवाही, आपसी तालमेल की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यहां के 250 से अधिक परिवारों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।

दो बूंद पानी का जुगाड़ करने के लिए यहां के लोगों को जंगल की ओर 500 मीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ रही है। प्राकृतिक जलस्त्रोत से पानी लाकर लोग प्यास बुझाने को मजबूर हैं। वार्ड 34 के स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि उनका क्षेत्र आज प्रशासनिक उपेक्षा, विभागीय हठधर्मिता और राजनीतिक उदासीनता का शिकार है। पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए उन्हें जंगल की चढ़ाई चढ़नी पड़ रही है। वहीं संकरी गलियों के कारण क्षेत्रवासी एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं से भी वंचित हैं। नागरिकों का कहना है कि आजादी के इतने दशक बाद भी सड़क न बनना यह दिखाता है कि स्मार्ट सिटी के दावों के बीच आज भी जमीनी हकीकत कितनी कड़वी है। स्थानीय जनता ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल संस्थान, बिजली विभाग और नगर निगम ने आपसी तालमेल बिठाकर इन समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आने वाले दिनों में वे उग्र आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।क्षेत्रवासियों के अनुसार, पहले इलाके में सुबह 7 से 8 बजे और शाम को 6 से 7 बजे तक पानी की नियमित सप्लाई की जाती थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। पिछले तीन-चार दिनों से पानी की आपूर्ति ठप होने के पीछे लोगों ने बिजली विभाग और जल संस्थान के बीच आपसी तालमेल न होने को मुख्य कारण बताया है। निवासियों का आरोप है कि जब भी पानी की सप्लाई का समय होता है, ठीक उसी वक्त क्षेत्र की बिजली काट दी जाती है, जिससे पानी की पंपिंग और सप्लाई बाधित हो जाती है।स्थानीय लोगों ने बताया कि जब इस संबंध में बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत की गई, तो वहां तैनात कर्मचारी ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि जेई साहब के बिजली काटने के साफ आदेश हैं। उपभोक्ताओं के अनुसार, बिजली काटने के पीछे कभी ‘अल्मोड़ा में काम चलने’ का बहाना बनाया जाता है, तो कभी अन्य तकनीकी कारण बताकर केवल कोरा आश्वासन दे दिया जाता है। निवासियों का कहना है कि इस विभागीय खींचतान का खामियाजा सीधे तौर पर आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। आक्रोशित जनता ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी दो-तीन दिनों में स्थिति नहीं सुधरी, तो वे जल संस्थान और विद्युत विभाग के कार्यालय पहुंचकर उग्र प्रदर्शन करेंगे।जंगल की चढ़ाई चढ़कर प्राकृतिक जलस्त्रोत से ला रहे पानीपुरानी चांदमारी क्षेत्र में लोग ऑटो किराए पर लेकर रेलवे स्टेशन और रानीबाग से पानी ढोकर ला रहे हैं या फिर महिलाएं और बच्चे जंगल की ओर जाकर 500 मीटर की खड़ी और खतरनाक चढ़ाई चढ़कर पीने का पानी लाने को मजबूर हैं। वार्ड 34 के अंतर्गत आने वाले पुरानी चांदमारी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए मात्र डेढ़ इंच की पाइपलाइन बिछाई गई है, जो इस घनी आबादी के लिए पूरी तरह नाकाफी है। इस लाइन में पानी का दबाव न के बराबर रहता है, जिस कारण पुरानी चांदमारी के 50-60 घरों में पानी बिल्कुल नहीं पहुंच पाता। यहां के निवासी पानी के लिए पूरी तरह से आस-पड़ोस के घरों, पारंपरिक प्राकृतिक जल स्रोतों या फिर वाहनों पर निर्भर हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में पानी के लिए किया जा रहा यह संघर्ष स्थानीय प्रशासन के दावों की पोल खोलता है।सिल्ट, कुप्रबंधन और संकरी गलियों का संकटबरसात के मौसम में पेयजल लाइनों में भारी मात्रा में सिल्ट जमा हो जाती है, जिसे साफ करने का कोई ठोस इंतजाम जल संस्थान के पास नहीं है, जिसके कारण पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो जाती है। इसके साथ ही बिजली विभाग और जल संस्थान के कर्मचारियों के बीच आपसी तालमेल का घोर अभाव है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर जनता को भुगतना पड़ रहा है। वार्ड की कई गलियां इतनी संकरी और संकुचित हैं कि संकट के समय वहां पानी के टैंकर भी नहीं पहुंच पाते, जिससे करीब 250 परिवार पूरी तरह पानी से महरूम हैं। क्षेत्र में गंदे नाले और सीवर लाइन की समस्या जस की तस बनी हुई है। जबकि यूयूएसडीए द्वारा दो साल पहले बिछाई गई पेयजल लाइन के बाद बनाई गई सड़कों में जल निकासी की व्यवस्था सही न होने के कारण अब बारीश का पानी बीच सड़क पर बहकर राह में खलल पैदा कर रहा है।योजनाएं सिर्फ फाइलों में सिमट कर रह गईंजनता का आरोप है कि उन्होंने जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को एक व्यावहारिक सुझाव देते हुए मांग की थी कि शीतला देवी मंदिर के पास स्थित जल स्रोत से पानी की सप्लाई को मुख्य पानी की टंकी तक जोड़ा जाए। यदि यह व्यवस्था हो जाती, तो क्षेत्र में पानी का संकट काफी हद तक कम हो सकता था, लेकिन यह योजना भी सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई और धरातल पर फलीभूत नहीं हो सकी। वहीं एक अन्य सुझाव देते हुए स्थानीय निवासियों ने इस गंभीर संकट से निपटने के लिए फिल्टर हाउस शीशमहल से एक नई 4 इंच की भारी क्षमता वाली पाइपलाइन डाली जानी चाहिए। कहा कि इस लाइन को नगर निगम बालिका इंटर कॉलेज के पास स्थित मुख्य पानी की टंकी से जोड़ा जाना चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है, तो पूरे वार्ड में पानी का दबाव सुधरेगा और लोगों के घरों तक आसानी से पानी की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की जा सकेगी।आजादी के बाद से सड़क को तरसती हीरागढ़ दलीप सिंह कॉलोनीवार्ड 34 का एक और स्याह पहलू हीरागढ़ दलीप सिंह कॉलोनी में देखने को मिलता है। इस कॉलोनी में करीब 20 परिवार निवास करते हैं। हैरत की बात यह है कि देश की आजादी के इतने दशकों बाद भी आज तक इस कॉलोनी के निवासियों को एक अदद पक्की सड़क नसीब नहीं हो पाई है। स्थानीय निवासियों द्वारा नगर निगम प्रशासन को कई बार लिखित प्रार्थना पत्र, शिकायतें और ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। आज भी यहां के लोग पथरीले और कच्चे रास्तों से होकर गुजरने को मजबूर हैं।नारायण विहार मार्ग पर विद्युत पोल बना मुसीबतवार्ड के अंतर्गत ही नारायण विहार से आगे जाने वाले मुख्य मार्ग पर बीचों-बीच एक विद्युत पोल (बिजली का खंभा) लगा हुआ है। इस पोल की वजह से यह मार्ग इतना संकरा हो चुका है कि क्षेत्र में आवश्यक सेवाएं पूरी तरह ठप हो जाती हैं। इलाके में न तो गैस सिलेंडर बांटने वाली गाड़ी आ पाती है, न नगर निगम की कूड़ा गाड़ी और सबसे गंभीर बात यह है कि किसी आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस भी अंदर नहीं आ पाती। इस समस्या के समाधान के लिए पूर्व ग्राम प्रधान और वर्तमान पार्षद प्रतिनिधि द्वारा नगर निगम और विद्युत विभाग को कई बार लिखित में अवगत कराया जा चुका है, मगर दोनों ही विभाग इस पोल को हटाने या स्थानांतरित करने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं।नालियों में जाल गायब, सुरक्षा से खिलवाड़कोरता क्षेत्र में स्थित सिंचाई गुल स्थानीय निवासियों और बच्चों के आवागमन का मुख्य रास्ता बनी हुई है, जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण किसी भी समय कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है। स्थानीय जनता लंबे समय से इस पूरी गुल के ऊपर लोहे का मजबूत जाल लगाने की मांग कर रही है, क्योंकि वार्ड में जगह-जगह नालियों पर लगे पुराने लोहे के जाल टूट चुके हैं, जो पैदल चलने वाले बुजुर्गों और बच्चों के लिए हर वक्त जानलेवा साबित हो रहे हैं। वहीं क्षेत्र की नालियों पर भी जगह-जगह लोगे के जाल गायब हैं जो वाहन चालकों के साथ पैदल राहगीरों के लिए भी खतरे का सबब बने हुए हैं।नेताओं के झूठे वादों को लेकर जनता में रोषवार्ड 34 की जनता में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब इस क्षेत्र को ग्राम सभा से हटाकर शहरी क्षेत्र यानी नगर निगम में शामिल किया गया था, तब उन्हें उम्मीद थी कि अब उनके दिन बहुरेंगे। लेकिन वास्तविकता इसके ठीक उलट रही। हर चुनाव (चाहे वह विधानसभा हो या नगर निगम) में नेता वोट मांगने आते हैं और हर बार यह वादा किया जाता है कि क्षेत्र की सड़क, पानी, सीवर और नालियों जैसी मूलभूत सुविधाओं को पूरी तरह दुरुस्त किया जाएगा। मगर चुनाव जीतते ही नेता और अधिकारी गायब हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वादे करना तो दूर, आज तक इस क्षेत्र की समस्याओं को समझने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई बुनियादी सर्वे तक नहीं कराया गया है।पांच शिकायतेंवार्ड में पिछले तीन-चार दिनों से पेयजल आपूर्ति बंद बिजली विभाग और जल संस्थान के बीच तालमेल की कमीसड़क, सीवर और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभावहीरागढ़ दलीप सिंह कॉलोनी के दर्जनों परिवार पक्की सड़क को तरस रहेनालियों से जाल गायब, रास्ते में बाधा बन रहे बिजली के पोलपांच सुझावशीशमहल फिल्टर हाउस से 4 इंच की नई पाइपलाइन डाली जाए पानी सप्लाई के निर्धारित समय पर बिजली कटौती न होमौजूदा पाइपलाइन को बदलकर बड़ी क्षमता की पाइपलाइन बिछाई जाए सड़क, नालियों और जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाएसिंचाई गूल व नालियों में लोहे के जाल लगाए, बाधा बन रहे बिजली के पोल हटाएंबोले लोगनगर निगम में शामिल होने के बाद हमें उम्मीद थी कि मूलभूत सुविधाएं बेहतर होंगी, लेकिन आज भी लोग पानी के लिए भटक रहे हैं। समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।नवीन पांडे, पूर्व ग्राम प्रधान, ब्यूरापानी की समस्या अब असहनीय हो चुकी है। कई परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरे इलाकों से पानी लाना पड़ रहा है, जो प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।कैलाश पांडेजल संस्थान और बिजली विभाग के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। पानी सप्लाई के समय बिजली कटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।केएस बिष्टमहिलाओं को घर के कामकाज के साथ पानी की व्यवस्था के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। कई बार घंटों इंतजार करने के बाद भी पानी नहीं मिल पाता।उषा देवीपुरानी चांदमारी के लोगों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। पर्याप्त पानी न मिलने से परिवारों को दूसरे स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जल्द हल निकाला जाना चाहिए।देवकी राणाहर चुनाव में विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बदलाव दिखाई नहीं देता। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, समाधान चाहती है।प्रेमा देवीसड़क, सीवर और जल निकासी की समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं। इन मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए। पेयजल हमारी मुख्य समस्या है।डीडी जोशीबरसात के समय हालात और खराब हो जाते हैं। पानी की लाइनें सिल्ट से भर जाती हैं और सड़क की ढाल सही नहीं होने से गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता है।पुष्पा जीनासंकरी गलियों के कारण पानी के टैंकर तक नहीं पहुंच पाते। इससे कई परिवारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पानी और बिजली वालों को समन्यव बनाते हुए कार्य करना चाहिए।हेमा तिवारीक्षेत्र में पेयजल एक बड़ी विकराल समस्या बन चुका है। कई बार अधिकारियों को सुझाव दिए जा चुके हैं लेकिन आज तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।भारती कोठारीपेयजल संकट के साथ-साथ सुरक्षा की समस्या भी गंभीर है। टूटी हुई नालियां और खुले गुल किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं। यहां की परेशानी देखने वाला कोई नहीं।गंगा देवीयदि शीशमहल फिल्टर हाउस से नई पाइपलाइन डाली जाए तो पूरे क्षेत्र को बड़ी राहत मिल सकती है। प्रशासन को इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।चंपा देवीनारायण विहार मार्ग पर लगा बिजली का खंभा लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। आपातकालीन सेवाओं का प्रभावित होना बेहद गंभीर विषय है।शोभाहीरागढ़ दलीप सिंह कॉलोनी के लोगों को आज भी सड़क का इंतजार है। कई बार मांग उठाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।कैलाशचंद्रजनता ने अपनी समस्याओं को कई बार अधिकारियों के सामने रखा, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।नंद किशोरवार्ड की समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब नगर निगम, जल संस्थान और बिजली विभाग मिलकर संयुक्त कार्ययोजना बनाएं। ऐसे किसी समस्या का हल निकलना मुश्किल है।कुबेर सिंह बोराबोले जिम्मेदार पांच एमएलडी की एक लाइन पेयजल निगम के द्वारा शीतलाहाट से डाली जा रही है, जिसके बाद पानी की किल्लत दूर होगी। जल संस्थान से लगातार पानी की सप्लाई की जा रही है। बरसात में सिल्ट आने से दिक्कत होती है लेकिन वह भी ज्यादा नहीं रहती। इसके अलावा ट्यूबवेल से यूयूयसडीए भी एक लाइन बिछाने का काम कर रहा है। क्षेत्र में जल्द ही पानी की समस्या से निजात मिल जाएगी। आरएस लोशाली, अधिशासी अभियंता, जल संस्थानक्षेत्र में जल्द चिन्हीकरण कर नालियों में जाल लगवाए जाएंगे, सड़क निर्माण को लेकर एक प्रस्ताव रखा जाएगा फिलहाल बरसाती सीजन में साफ-सफाई कूड़े उठान की व्यवस्था निगम की ओर से चाक-चौबंद की गई है।पारितोष वर्मा, नगर आयुक्त

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