Haldwani News: हरेला मेले का भव्य आगाज, लोक संस्कृति के रंगों के साथ गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संदेश
Haldwani News: हल्द्वानी में हरेला मेले का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुभारंभ हुआ। मेले में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक परंपराओं का संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का उद्घाटन हुकुम सिंह कुंवर और खड़ग सिंह बगड़वाल ने किया। 16 जुलाई तक विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
Haldwani News: हल्द्वानी। हीरानगर स्थित पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच में रविवार को पांच दिवसीय हरेला मेले का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। गोल्ज्यू देवता के पूजन से शुरू हुए मेले में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिला। उद्घाटन अवसर पर लोकगीत, लोकनृत्य और बच्चों की प्रतियोगिताओं ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।
उद्घाटन समारोह
मेले का उद्घाटन मंच के संरक्षक एवं राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष हुकुम सिंह कुंवर तथा मंच अध्यक्ष खड़ग सिंह बगड़वाल ने किया। उन्होंने कहा कि हरेला केवल पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, हरियाली संवर्धन और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। उद्घाटन के बाद पारंपरिक संस्कार गीतों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुए। 6 से 13 वर्ष आयु वर्ग की एकल लोकगीत प्रतियोगिता और कनिष्ठ वर्ग की समूह लोकनृत्य प्रतियोगिता में बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा व लोकधुनों पर शानदार प्रस्तुतियां वाहवाही बटोरी। शाम की सांस्कृतिक संध्या में लोकगायिका बबीता देवी ने कुमाऊंनी भजनों और लोकगीतों से मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं लोकगायक पुष्कर मेहरा ने अपने लोकप्रिय गीतों से दर्शकों को देर तक झूमने पर मजबूर किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों से पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम में हुकुम सिंह कुंवर, बीना कुंवर, खड़ग सिंह बगड़वाल, गीता बगड़वाल सहित मंच के पदाधिकारियों ने यजमान की भूमिका निभाई। मंच के सचिव देवेंद्र तोलिया, कोषाध्यक्ष त्रिलोक बनोली, शोभा बिष्ट, हेमंत बगड़वाल, पुष्पा संभल, विमला सांगुड़ी, गुणवंत सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
सांस्कृतिक आयोजनों की सूची
16 जुलाई तक होंगे विविध सांस्कृतिक आयोजन। आयोजकों के अनुसार 16 जुलाई तक चलने वाले मेले में लोकगीत-लोकनृत्य प्रतियोगिताओं के अलावा कवि सम्मेलन, सांस्कृतिक संध्याएं, पारंपरिक खेल, बच्चों के कार्यक्रम और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित होंगी। मेले का उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना, युवा पीढ़ी को लोक विरासत से जोड़ना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है。
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