बच्चे बाहर नौकरी में, बूढ़े मां-बाप सिलेंडर को भटक रहे
हल्द्वानी के 70 वर्षीय रमेश जोशी अपने विदेश में नौकरी कर रहे बेटों के बावजूद गैस सिलेंडर के लिए दर-दर भटक रहे हैं। डॉक्टर ने उन्हें चलने-फिरने से मना किया है, फिर भी वह लगातार गैस एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। उन्हें पिछले एक सप्ताह से सिलेंडर नहीं मिला है, जिससे रसोई का काम प्रभावित हो रहा है।

हल्द्वानी। एक बेटा विदेश में माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनी में भविष्य संवार रहा है, तो दूसरा देहरादून में जॉब कर रहा है। लेकिन नियति देखिए कि इन दोनों भाईयों के 70 वर्षीय पिता हल्द्वानी की सड़कों पर एक सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। आराम करने के दिनों की उम्र में बुजुर्ग गैस की रसीद लेकर एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। जबकि उन्हें डॉक्टर ने चलने-फिरने को मना किया है। रविवार को छुट्टी के दिन भी उम्मीदें लेकर कमलुवागांजा निवासी रमेश जोशी हल्द्वानी इंडेन की एजेंसी पहुंचे। बताया कि वे पिछले एक सप्ताह से लगातार गैस एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाया है।
एजेंसी की ओर से हर बार मंगलवार तक सप्लाई आने का आश्वासन दिया जा रहा है। रमेश जोशी के अनुसार, उनके दोनों बेटे बाहर नौकरी करते हैं। एक अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट में कार्यरत है, जबकि दूसरा देहरादून की एक निजी कंपनी में काम करता है। घर पर वे अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी आखिरी बुकिंग 16 मार्च को की गई थी, लेकिन तब से अब तक सिलेंडर नहीं मिला है। बताया कि लगाया हुआ सिलेंडर खत्म होने वाला है।डॉक्टर ने चलने-फिरने को किया है मनारमेश बताते हैं कि उन्हें लो मेडिकल कैटेगरी की बीमारी है। इसके तहत ज्यादा भीड़भाड़ और चलने फिरने से बचना होता है। इसके अलावा सांस की भी दिक्कत हो ती है। लेकिन स्वास्थ्य ठीक न होने के बावजूद उन्हें रोज एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। गैस की कमी से रसोई का काम भी प्रभावित हो रहा है।
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