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सिंचाई के पानी को एसडीएम दफ्तर पर किसानों का प्रदर्शन

हल्द्वानी। गौलापार के किसानों ने बुधवार को फसलों की सिंचाई के लिए पानी को...

सिंचाई के पानी को एसडीएम दफ्तर पर किसानों का प्रदर्शन
हिन्दुस्तान टीम,हल्द्वानीThu, 22 Feb 2024 12:30 PM
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हल्द्वानी। गौलापार के किसानों ने बुधवार को फसलों की सिंचाई के लिए पानी को एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा नहर में पानी नहीं आने से उनकी फसलें खराब होने की कगार पर पहुंच गईं हैं। प्रशासन को सिंचाई के लिए पानी देने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में पांच हजार से ज्यादा किसान खेती के भरोसे अपनी परिवार का भरण पोषण करते हैं। किसानों की खेतों की सिंचाई के लिए गौला बैराज से मिलने वाले पानी पर निर्भरता बनी रहती है, लेकिन पिछले एक माह से बैराज से क्षेत्र तक पानी पहुंचाने वाली नहर की मरम्मत का काम सिंचाई विभाग कर रहा है। ऐसे में किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पानी मिलना बंद हो गया है। जिससे फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई है। इसीलिए किसानों ने बुधवार को एसडीएम कार्यालय में प्रदर्शन किया। कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए विभाग ने नहर की मरम्मत का काम शुरू कर दिया। जिससे किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने फसल के लिए सिंचाई की व्यवस्था नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। यहां ग्राम प्रधान हीरा सिंह बिष्ट, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य अर्जुन बिष्ट, हरीश पलडिया, सुरेंद्र सिंह राणा, देवेंद्र सिंह, महेंद्र मेहता, चंदन राणा, इंद्रपाल आर्या मौजूद रहे।

2485 हेक्टेयर जमीन को पानी की जरूरत

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार गौलापार क्षेत्र में 2485 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती की जाती है। असिंचित जमीन होने से सिंचाई के लिए इसमें खेती करने वाले पांच हजार से ज्यादा किसान गौला नदी पर निर्भर हैं। बिना पूर्व तैयारी के नहर का पानी बंद किए जाने से खेतों में लगी फसल के खराब होने की आंशका बनी हुई है।

इन फसलों के लिए है पानी की जरूरत

किसानों के खेतों में अभी मुख्य रूप से गेहूं की फसल को उगाया गया है। इसके साथ ही क्षेत्र में व्यवसायिक उपयोग के टमाटर, प्याज, लहसुन, मसूर, मटर और चने की खेती किसानी किसानों ने की है। अभी वसंत का मौसम शुरू होने से इन्हें सिंचाई की जरूरत है। वहीं दुधारू पशुओं के लिए खेतों में बोए गए चारे की भी सिंचाई नहीं हो पा रही है।

ट्यूबवेल से पूरी नहीं होती जरूरत

नहर के साथ ही क्षेत्र में सिंचाई के लिए विभाग ने ट्यूबवेल बनाए हैं। इनसे निकलने वाली गूलों की पहुंच हर खेत नहीं होने से सिंचाई का समाधान नहीं हो पा रहा है। वहीं ट्यूबवेल से मिलने वाले पानी के लिए किसानों को अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ता है। जबकि नदी का पानी किसानों को निशुल्क मिलता है।

बयान:

डिजाइन तैयार होने के बाद क्षतिग्रस्त नहर को ठीक करने का कार्य किया जा रहा है। जल्द ही वैकल्पिक तरीके से नहर से किसानों को पानी दिया जाएगा।

-बीएस नैनवाल, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग

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