वन भूमि पर बसे गांवों को राजस्व दर्जा देने की मांग तेज
हल्द्वानी में आयोजित अखिल भारतीय किसान महासभा की बैठक में वन भूमि पर बसे गांवों को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग की गई। बागजाला, बिंदुखत्ता, और लालकुआं क्षेत्र के अन्य गांवों को इस प्रस्ताव में शामिल करने की बात कही गई। भाकपा (माले) के जिला सचिव ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जनता को भ्रमित कर रही है।

हल्द्वानी, मुख्य संवाददाता। गौलापार क्षेत्र स्थित बागजाला में आयोजित अखिल भारतीय किसान महासभा की बैठक में वन भूमि पर बसे गांवों को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग प्रमुखता से उठी। सोमवार को धरना स्थल पर बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि बागजाला, बिंदुखत्ता, सुल्ताननगरी, दानी बंगर, खोलिया बंगर समेत लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के सभी वन खत्तों को राजस्व गांव घोषित करने का विधिसम्मत प्रस्ताव 9 मार्च से गैरसैंण में शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में पारित किया जाए। भाकपा (माले) के जिला सचिव डॉ. कैलाश पांडेय ने आरोप लगाया कि वन भूमि वासियों को मालिकाना हक देने के मुद्दे पर जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
यदि जनहित में गंभीरता है तो पूरे क्षेत्र के लिए ठोस प्रस्ताव लाया जाए। महासभा उपाध्यक्ष विमला देवी ने कहा कि बागजाला समेत दशकों से बसे गांवों को प्रस्ताव में शामिल किया जाए, अन्यथा चुनाव में जवाब मिलेगा। बैठक में गणेश राम, मीना भट्ट, पंकज चौहान सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
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