Haldwani News: आपरेशन के लिए आयी महिला ने रात अस्पताल में गुजारी, सुबह आपरेशन की नई डेट मिली
Haldwani News: हल्द्वानी के एसटीएच के स्त्री रोग विभाग में डॉक्टरों की भारी कमी से मरीजों के ऑपरेशन टल रहे हैं। दुरस्थ गांव की जीवंती देवी को बार-बार ऑपरेशन की डेट बदलने पर अस्पताल में भर्ती किया गया। महिला अस्पताल का भी दबाव बढ़ा है। विभाग में केवल दो डॉक्टर हैं, जिससे सर्जरी करने में कठिनाई आ रही है।
Haldwani News: हल्द्वानी । एसटीएच का स्त्री रोग विभाग सबसे ज्यादा डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। हालत यह है कि मरीजों के ऑपरेशन लगातार टालने पड़ रहे हैं। इसका खामियाजा पहाड़ के दुरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को झेलना पड़ रहा है। आपरेशन टलने के बाद दुरस्थ गांव से आई एक महिला की परेशानी को देखते हुए मजबूरी में उसे भर्ती कर लिया।
पिथौरागढ़ के दुरस्थ गांव की स्थिति
पिथौरागढ़ के दुरस्थ गांव देवलथल निवासी जीवंती देवी को 24 जून को स्त्री रोग विशेषज्ञ ने जांच के बाद उन्हें 18 जुलाई को ऑपरेशन की डेट दी थी। जीवंती देवी 17 जुलाई को अपने भाई प्रकाश राम और बेटे कमल के एसटीएच पहुंची। किसी तरह से रात काटने के बाद इस उम्मीद से विभाग पहुंची की उसका शनिवार को आपरेशन हो जाएगा। डॉक्टरों की कमी के चलते महिला को 24 जुलाई आपरेशन की डेट दे दी गई है। जीवंती की परेशानी देखते हुए उसे भर्ती कर दिया गया है। सूत्रों का कहना है की जीवंती जैसे और भी मरीज हैं जिनकी आपरेशन की डेट खिसका दी गई है।
महिला अस्पताल ने बढ़ायी परेशानी
राजकीय महिला अस्पताल ने भी एसटीएच की परेशानी को बढ़ा दिया है। महिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के ट्रांसफर के बाद दिक्कत शुरू हो गई है। जो तैनात है उन पर ओपीडी सर्जरी और इमरजेंसी का दबाव है। डॉक्टर किसी भी मरीज में थोड़ी सी भी कांप्लिकेशन देखते हैं तो तुरंत एसटीएच रेफर कर देते हैं जिससे एसटीएच में दबाव और बढ़ गया है।
एचओडी ट्रांसफर से दोगुनी समस्या
स्त्री रोग विभाग में 15 डाक्टरों की जरूरत है। पर यहां पर मात्र दो डॉक्टर एक असिस्टेंट एक एसोसिएट प्रोफेसर तैनात है। एचओडी प्रोफेसर डॉ. गोदावरी जोशी का 30 जून को पिथौरागढ़ ट्रांसफर हो गया है। स्त्री रोग विभाग में तैनात एक डॉक्टर ने बताया कि जिन महिला मरीजों को एचओडी डॉ. जोशी ने आपरेशन की डेट दी गई थी उनका जिम्मा भी अब दो शेष बचे सीनियर फैकल्टी पर आ गया है। जिसके चलते मरीजों की डेट को आगे खिसकाना मजबूरी हो गया है।
ओपीडी, इमरजेंसी, सर्जरी, प्रसव और पढ़ाई
एसडीएच में वर्तमान में दो फैकल्टी हैं। इनका काम रोजाना ओपीडी में मरीजों को देखना है। वहीं सर्जरी कराना और यूजी पीजी के छात्रों की कक्षाएं लेना है। इमरजेंसी में सर्जरी करना भी इनकी ड्यूटी है। स्त्री रोग विभाग में प्रतिदिन 150 से अधिक की ओपीडी है वहीं 30 से ज्यादा गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए भर्ती होती हैं। विभाग के वार्ड में 100 से अधिक बेड हमेशा भरे रहते हैं। ऐसे में डॉक्टर भारी दबाव में काम करने को मजबूर हैं।
- एसटीएच के स्त्री रोग विभाग में मरीजों का काफी दबाव है। विभाग में फैकल्टी की काफी कमी है। जिसके चलते मरीजों को आपरेशन की डेट खिसकानी पड़ रही है। शासन से निर्देश पर जल्द ही फैकल्टी की नई भर्ती के लिए इंटरव्यू आयोजित कराए जाएंगे ताकि फैकल्टी की कमी दूर की जा सके।
डॉ. अरुण जोशी, एमएस, एसटीएच
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